नगर निगम में शामिल किए गए 31 गांवों के 40 हजार लोगों के लिए प्रॉपर्टी टैक्स को लेकर बड़ी राहत देनी वाली खबर है। उन्हें कर भरने से छूट दे दी गई है। वह अपनी मर्जी से प्रॉपर्टी टैक्स भरना चाहें तो भर सकते हैं, लेकिन निगम की ओर से उन पर कोई दबाव नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही निगम उनको प्रॉपर्टी टैक्स के लिए कोई नोटिस भी नहीं भेजेगा, क्योंकि इन सभी का प्रॉपर्टी टैक्स माफ करने के लिए शासन को फाइल भेजी गई है। वहां से कोई फैसला नहीं होने तक लोग अपनी मर्जी से प्रॉपर्टी टैक्स भर सकेंगे। हालांकि यह कहा जा रहा है कि टैक्स माफ करने के लिए शासन से मुहर लग चुकी है और अधिकारियों को केवल आदेश का इंतजार है, लेकिन उसके बावजूद फिलहाल अधिकारियों ने लोगों को अपनी मर्जी से प्रॉपर्टी टैक्स भरने की छूट दी है।
सोनीपत नगर परिषद को 2015 में मिला नगर निगम का दर्जा
सोनीपत नगर परिषद को 2015 में नगर निगम का दर्जा दिया गया था और उसके बाद प्रॉपर्टी टैक्स के लिए सर्वे कराया गया था। इसमें शहर के साथ ही 31 गांव भी शामिल किए गए थे। इसका सर्वे कराए जाने के बाद प्रॉपर्टी टैक्स के लिए 1 लाख 40 हजार से ज्यादा लोगों की सूची तैयार की गई। इनमें से 1.15 लाख रिहायशी तो 25 हजार कामर्शियल प्रॉपर्टी हैं। इनमें भी लगभग 40 हजार रिहायशी व कॉमर्शिलय प्रॉपर्टी ऐसी है जो उन 31 गांवों में आती है, जिनको नगर निगम बनने के बाद इसमें शामिल किया गया है। इन सभी जगह नगर निगम की ओर से प्रॉपर्टी टैक्स जमा करने के लिए बिल भेज दिए गए।
विकास न होने पर मिला बिल तो भड़के लोग
निगम की ओर से कोई विकास नहीं होने के बावजूद प्रॉपर्टी टैक्स के बिल आने पर लोग भड़क गए और इसका विरोध शुरू कर दिया गया। इस मामले में शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन के हस्तक्षेप करने पर नगर निगम की ओर से इस बार गांवों के प्रॉपर्टी टैक्स बिल माफ करने के लिए शासन को फाइल भेजी। उसमें कहा गया कि इन गांवों को निगम में अभी शामिल किया गया है और वहां अभी विकास कराया जाना है, जिसके बाद वहां से प्रॉपर्टी टैक्स लिया जाए।
माफ होने पर जमा कराया टैक्स होगा वापस
निगम सूत्रों के अनुसार उस पर शासन की मुहर लग गई है, लेकिन अभी इसका आदेश नहीं आया है। इसके बावजूद भी निगम अधिकारियों ने गांव के लोगों को प्रॉपर्टी टैक्स भरने में बड़ी राहत दी है। निगम अधिकारियों ने लोगों से साफ कर दिया है कि वह शासन का आदेश आने तक अपना प्रापर्टी टेक्स बिल ना भरें। इसके बावजूद भी कोई बिल भरना चाहता है और उसे बाद में माफ किया जाता है तो उसे वापस कर दिया जाएगा।
गांवों में चल रहा कड़ा विरोध
नगर निगम में शामिल किए गए 31 गांवों के लोग उसी समय भड़क गए, जब उनको प्रॉपर्टी टैक्स के बिल भेज दिए गए। लोगों ने आरोप लगाया कि निगम की ओर से विकास कार्य नहीं कराया गया और प्रॉपर्टी टैक्स बिल भेज दिए गए। इसको लेकर ही आए दिन गांवों में पंचायत हो रही हैं तो कई जगह सीएम व मंत्री के पुतले तक फूंके जा रहे हैं। इस विरोध को देखते हुए गांवों का प्रॉपर्टी टैक्स माफ कराने की तैयारी की गई और फिलहाल गांवों के प्रॉपर्टी टैक्स को भरने की छूट दी गई। इससे लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं हो सके और वह विरोध भी बंद कर दें।
गांवों के लोग मर्जी से भर सकते हैं टैक्स
गांवों का प्रॉपर्टी टैक्स माफ कराने के लिए शासन को फाइल भेजी गई है, लेकिन अभी उसको लेकर कोई आदेश नहीं आया है। इस कारण ही लोगों से कह दिया गया है कि वह आदेश आने तक अपनी मर्जी के अनुसार टैक्स भर सकते हैं। टैक्स माफ करने का आदेश आता है तो उसी के आधार पर जिनका रुपया जमा हुआ होगा, उसे अन्य किसी जगह एडजस्ट कर दिया जाएगा या वापस कर दिया जाएगा।
-वीरेंद्र हुड्डा, कमिश्नर, नगर निगम