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बच्चे आए देरी से, पेपर भी था आउट ऑफ सिलेबस

Mon, 02 May 2016 01:10 AM IST
अमर उजाला, सोनीपत
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134a - फोटो : sonepat
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नियम 134-ए के तहत बच्चों के दाखिले के लिए रविवार को शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित लर्निंग लेवल असेसमेंट टेस्ट अव्यवस्थाओं के बीच संपन्न हुआ। कक्षा 11वीं को छोड़कर दूसरी से लेकर 12वीं तक के कुल 5 हजार 847 बच्चों ने यह परीक्षा देनी थी, लेकिन इसमें से 4 हजार 632 बच्चे ही परीक्षा दे पाए। 1215 बच्चे परीक्षा देने से वंचित रह गए। टेस्ट पूरी तरह से अव्यवस्थाओं के बीच ही संपन्न हुआ। सेंटरों पर उचित व्यवस्था नहीं था। लगभग हर एक सेंटर पर बच्चे देरी से पहुंच रहे थे। इस कारण परेशानी हो रही थी। यही नहीं कई कक्षाओं का पेपर आउट ऑफ सिलेबस रहा। वहीं, इंग्लिश मीडियम के बच्चों को पेपर के हिंदी मीडियम में होने से परेशानी उठानी पड़ी।
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दो हिस्सों में था टेस्ट
टेस्ट दो हिस्सों में हुआ था। दूसरी से आठवीं कक्षा तक के 4575 बच्चों ने परीक्षाएं देनी थी, जिसमें 3638 बच्चों ने परीक्षा दी। वहीं नौवीं, दसवीं और बारहवीं के 1272 बच्चे थे। इसमें से 994 बच्चों ने परीक्षाएं दी। इस तरह से 937 बच्चे दूसरी से आठवीं तक के और नौवीं से 12वीं तक के 278 बच्चे टेस्ट नहीं दे पाए।

समय को लेकर नहीं किया था सूचित
विभिन्न स्कूलों के बाहर टेस्ट के दौरान अभिभावकों ने प्रदर्शन भी किया। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग ने उन्हें सही तरह से सूचित नहीं किया था। ये वो अभिभावक थे, जोकि देरी से पहुंचे थे। इनमें से कइयों के बच्चों को टेस्ट में बैठने दिया गया था, वहीं कइयों को टेस्ट में बैठने नहीं दिया गया। आरोप लगाया कि अगर विभाग 18 अप्रैल को ही टेस्ट के बारे में बताता तो बच्चे तैयारी के साथ और समय पर आते।
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मंच और संघ की मांग दोबारा से हो टेस्ट
इस मामले में हरियाणा अभिभावक मंच तथा छात्र अभिभावक संघ ने दोबारा से टेस्ट करवाए जाने की मांग रखी है। संघ के विमल किशोर तथा मंच के राजीव वर्मा ने कहा कि टेस्ट से कई बच्चे वंचित रहे हैं। इसीलिए इन बच्चों को टेस्ट देने का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि कई मेधावी बच्चे शिक्षा विभाग द्वारा समय पर सूचित न करने की वजह से ही सेंटर पर नहीं पहुंच पाए।
क्या कहते हैं बच्चे

थोड़ी हुई थी लेट, टेस्ट में तो बैठने नहीं देते
- 10वीं कक्षा के लिए टेस्ट देना था, मैं तो थोड़ी देर ही लेट हुई थी। अगर टेस्ट देने देते तो अच्छा होता। समय कम मिला था, लेकिन मैंने तैयारी भी पूरी की थी। मेरे भाई को भी टेस्ट में बैठने नहीं दिया गया।
शिवानी, सेक्टर 23
मैं लिटल स्कॉलर स्कूल में इंग्लिश मीडियम में पढ़ता हूं। पेपर थोड़ा आउट ऑफ सलेब्स था, उसकी खास दिक्कत नहीं। लेकिन पेपर हिंदी के साथ इंग्लिश में भी होता तो और अच्छा हो जाता।
नमन, सेक्टर 15

मैम से पूछने पड़े कई शब्द तो
पेपर हिंदी मीडियम में था, जबकि हम हैं इंग्लिश मीडियम के स्टूडेंट। इसी वजह से दिक्कत हुई थी। कई बार कई शब्द मैम से पूछने पड़े। इंग्लिश और हिंदी दोनों मीडियम में पेपर होना चाहिए था।
मानसी, म्यूर विहार

अच्छा हुआ पेपर, थोड़ा बाहर से था
- पेपर तो थोड़ा बाहर से था, लेकिन कोई खास दिक्कत नहीं हुई। 100 नंबर का पेपर आसानी से हो गया। नंबर अच्छे आने की उम्मीद हैं। नंबर अच्छे आएंगे तो च्वाइस के स्कूल में एडमिशन भी हो जाएगा।
काजल, गढ़ी ब्राह्मणान

कुल 5847 बच्चों ने टेस्ट देना था, 4632 ने परीक्षा दी है। 1215 परीक्षा में नहीं बैठ पाए। जो बच्चे आधा घंटा भी लेट थे, उन्हें टेस्ट में बिठाया गया था।
परमेश्वरी हुड्डा, शिक्षा अधिकारी।

गोहाना। 134 के तहत निजी स्कूलों में दाखिले के लिए रविवार को गोहाना, मुंडलाना व कथूरा ब्लॉक में लिखित परीक्षा हुई। तीनों ब्लॉकों की 2960 सीटों पर 1012 बच्चों ने दी लिखित परीक्षा ने एक साथ परीक्षा दी। वहीं परीक्षा में प्रवेश न कर पाने के कारण अभिभावकों ने विभाग के खिलाफ रोष जाहिर किया। गोहाना में दूसरी से आठवीं तक 977 बच्चों की परीक्षा होनी हैं। जिसके लिए तीन सेंटर तय किए गए हैं जहां कक्षा-2 से पांचवीं तक के बच्चों के लिए छोटूराम चौक स्थित राजकीय कन्या वरिष्ट माध्यमिक विद्यालय, कक्षा 6 से कक्षा 8 तक पुरानी अनाज मंडी स्थित राजकीय कन्या वरिष्ट माध्यमिक विद्यालय और कक्षा 9 से 12 तक समता चौक स्थित राजकीय वरिष्ट माध्यमिक विद्यालय सैंटर नियुक्त किया गया है। इसके अलावा कथूरा ब्लॉक के बच्चों के लिए गांव गुढ़ा का राजकीय उच्च विद्यायल और मुंडलाना ब्लॉक के बच्चों के लिए शहर का बाल भारती स्कूल निर्धारित किया गया।
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