संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। मनौली गांव में कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से किसान गोष्ठी एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें 40 से अधिक किसानों ने भाग लिया। इस दौरान किसानों को कृषि भूमि की उर्वरता बनाए रखने, उत्पादन लागत कम करने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक किया।
विशेषज्ञों ने बताया कि मृदा, जल एवं पर्यावरण का संरक्षण भविष्य की कृषि सुरक्षा की मजबूत आधारशिला है। किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग, जैविक एवं प्राकृतिक संसाधनों के समुचित प्रयोग व गुणवत्तापूर्ण कृषि आदानों के चयन के बारे में भी जानकारी दी गई।
उन्होंने बताया कि इन उपायों को अपनाकर किसान न केवल उत्पादन बढ़ा सकते हैं बल्कि खेती को अधिक लाभकारी एवं पर्यावरण अनुकूल भी बना सकते हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र के सीनियर को ऑर्डिनेटर डॉ. जितेंद्र सिंह बामल ने बताया कि जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वर्तमान एवं भविष्य की कृषि चुनौतियों के प्रति सजग करना और आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों से जोड़ना है।
उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में भाग लेने वाले किसानों को ऐसी कृषि पद्धतियों की जानकारी दी गई जिनके माध्यम से वे अपनी फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के साथ कृषि लागत में भी कमी ला सकते हैं।
उन्होंने किसानों का आह्वान किया कि वह वैज्ञानिक कृषि तकनीकों व प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण आधारित खेती को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने व कृषि को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित बनाने में योगदान दें।