कुंडली बॉर्डर पर मुख्य मंच से संबोधित करते किसान नेता।
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संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने कहा कि केंद्र सरकार की तरफ से अभी तक कोई औपचारिक आश्वासन नहीं मिलने के कारण किसान अपनी लंबित मांगों के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में आंदोलन को वापस लेने के लिए 6 प्रमुख मांगें उठाई थीं मगर सरकार की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। ऐसे में किसानों को आंदोलन जारी रखने के लिए बाध्य किया जा रहा है।
एसकेएम समन्वय समिति के सदस्य डॉ. दर्शन पाल ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में जिन 6 मुद्दों का जिक्र किया है उनमें से एक प्रदर्शनकारी किसानों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने का था। विशेष रूप से भाजपा शासित राज्यों हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में हजारों किसानों के खिलाफ सैकड़ों बेबुनियाद और झूठे मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि यह केवल हरियाणा के मामलों के बारे में नहीं है बल्कि हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में भी मामले हैं। इस बीच, दिल्ली की सीमाओं और अन्य जगहों पर दर्जनों स्थानों पर पक्के मोर्चा जारी हैं, जो विरोध कर रहे किसानों के अनुशासन और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।
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साथ ही दर्शाता है कि सरकार किसानों को आंदोलन जारी रखने के लिए बाध्य कर रही है। भाजपा नेता और उसकी राज्य सरकारें केंद्र सरकार से एक संकेत की प्रतीक्षा कर रही हैं। ऐसे में यह केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि वह लंबित मांगों पर तत्काल कार्रवाई करे।
भाजपा विधायक के वीडियो ने खोली अपनी सरकार की पोल
एसकेएम नेता ने कहा कि उत्तर प्रदेश से भाजपा विधायक रोमी शाहनी अपनी ही प्रदेश सरकार पर किसानों के मुद्दों को हल करने के लिए दबाव डाल रहे हैं। राज्य में चुनाव नजदीक हैं। एक वीडियो में भाजपा विधायक को गन्ना किसानों के बकाया का भुगतान करने की गुहार लगाते हुए सुना जा सकता है। इससे जाहिर है कि भाजपा के दावों के विपरीत किसानों के गन्ने का भुगतान अभी बकाया है।