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MSP Committee: SKM ने MSP व अन्य मुद्दों पर बनी कमेटी को किया खारिज, किसान नेताओं ने कहा- संघर्ष रखेंगे जारी

Tue, 19 Jul 2022 11:27 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत (हरियाणा)

सार

किसान मोर्चा केंद्र सरकार की कमेटी में अपना कोई प्रतिनिधि नामांकित नहीं करेगा। एसकेएम नेता बोले कि सरकारी सदस्यों से भरी कमेटी से कोई उम्मीद नहीं है। 
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किसान नेता दर्शन पाल सिंह। - फोटो : एएनआई (फाइल फोटो)
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विस्तार
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संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने केंद्र सरकार की तरफ से एमएसपी व अन्य कई मुद्दों पर बनाई गई कमेटी को खारिज कर दिया है। एसकेएम नेताओं का कहना है कि वह कमेटी में अपना कोई भी प्रतिनिधि नामांकित नहीं करेंगे। साथ ही कहा कि जब तक सरकार इस समिति के अधिकार क्षेत्र और कार्यक्षेत्र स्पष्ट नहीं करती तब तक इसमें उनके प्रतिनिधि का नामांकन करने का औचित्य नहीं है।

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नेताओं ने कहा कि सरकारी सदस्यों व उनके पक्ष के लोगों से भरी इस कमेटी के एजेंडे में एमएसपी कानून की चर्चा करने की कोई गुंजाइश नजर नहीं आ रही है। ऐसे में एमएसपी की कानूनी गारंटी हासिल करने के लिए संघर्ष जारी रहेगा।

संयुक्त किसान मोर्चा समन्वय समिति के सदस्य डॉ. दर्शन पाल ने कहा कि प्रधानमंत्री की तरफ से 19 नवंबर, 2021 को तीन कृषि कानून रद्द करने की घोषणा के साथ जब इस कमेटी की घोषणा की गई थी तभी से मोर्चा ने ऐसी किसी कमेटी के बारे में अपने संदेह सार्वजनिक किए थे।
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मार्च के महीने में जब सरकार ने मोर्चे से इस कमेटी के लिए नाम मांगे थे तब भी मोर्चा ने सरकार से कमेटी के बारे में स्पष्टीकरण मांगा था जिसका जवाब कभी नहीं मिला। 3 जुलाई को एसकेएम की राष्ट्रीय बैठक में सर्वसम्मति से फैसला किया था कि जब तक सरकार कमेटी के अधिकार क्षेत्र और कार्यक्षेत्र स्पष्ट नहीं करती तब तक इस कमेटी में एसकेएम के प्रतिनिधि का नामांकन करने का औचित्य नहीं है।

डॉ. दर्शन पाल ने कहा कि संसद अधिवेशन से पहले इस कमेटी की घोषणा कर सरकार ने कागजी खानापूर्ति पूरी करने का प्रयास किया है लेकिन नोटिफिकेशन से सरकार की बदनीयत और कमेटी की अप्रासंगिकता स्पष्ट हो जाती है। उन्होंने कहा कि कमेटी के अध्यक्ष पूर्व कृषि सचिव संजय अग्रवाल हैं जिन्होंने तीनों किसान विरोधी कानून बनाए।

उनके साथ नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद भी हैं जो इन तीनों कानूनों के मुख्य पक्षधर रहे हैं। विशेषज्ञ के नाते वे अर्थशास्त्री हैं जो एमएसपी को कानूनी दर्जा देने के विरुद्ध रहे हैं। उन्होंने कहा कि कमेटी में एसकेएम के 3 प्रतिनिधियों के लिए जगह छोड़ी गई है लेकिन बाकी स्थानों में किसान नेताओं के नाम पर सरकार ने अपने 5 तरफदार लोगों को जोड़ लिया है जिन सभी ने खुलकर तीनों किसान विरोधी कानूनों की वकालत की थी।

कमेटी के एजेंडा में एमएसपी पर कानून बनाने का जिक्र तक नहीं है। यानी कि यह प्रश्न कमेटी के सामने रखा ही नहीं जाएगा। एजेंडा में कुछ ऐसे मुद्दे शामिल कि गए हैं जिन पर सरकार की कमेटी पहले से बनी हुई है। कृषि विपणन में सुधार के नाम पर एक ऐसा मुद्दा डाला गया है जिसके जरिये सरकार पिछले दरवाजे से तीन कृषि कानूनों को वापस लाने की कोशिश कर सकती है।

उन्होंने कहा कि किसानों को फसल का उचित भाव दिलाने के लिए एमएसपी की कानूनी गारंटी हासिल करने के लिए एसकेएम का संघर्ष लगातार जारी रहेगा। किसानों की भलाई को हर संभव प्रयास करते रहेंगे।

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