सोनीपत। रिश्वत लेने के आरोप में उपायुक्त के निजी सहायक की गिरफ्तारी के बाद आगे की जांच के लिए स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) का गठन किया गया है। एंटी करप्शन ब्यूरो के साथ संयुक्त रूप से एसआईटी जांच को आगे बढ़ागी।
डीसीपी नरेंद्र कादियान के नेतृत्व में चार सदस्यीय समिति का गठन किया गया है, जो इस मामले की गहनता से जांच करेगी। एसआईटी ने आरोपी के खातों में 76 लाख रुपये के लेनदेन की बात सामने आने के बाद यह कदम उठाया है। एसीबी उन लोगों को भी जल्द ही पूछताछ के लिए बुलाएगी, जिन्होंने आरोपी निजी सहायक को रिश्वत की रकम ट्रांसफर की।
उपायुक्त का निजी सहायक शशांक शर्मा उपायुक्त कार्यालय में तैनात लिपिक जितेंद्र कुमार को राई तहसील में रजिस्ट्री क्लर्क के पद पर ट्रांसफर करने के नाम पर मांग मांगी थी। शशांक के पास से 3.5 लाख रुपये बरामद हुए हैं, जो उसने रिश्वत के तौर पर वसूले थे।
कर्मचारी को राई तहसील में ट्रांसफर कराने के एवज में शशांक शर्मा ने पांच लाख रुपये की मांग की थी।जितेंद्र की सूचना पर एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने शशांक को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया था। निजी सहायक के बैंक अकाउंट से 76 लाख रुपये के लेनदेन की बात सामने आई है। उसके फोन की जांच में वर्ष 2022 से जून, 2025 तक कई संदिग्ध ट्रांजेक्शन मिली है। आरोपी ने ये लेनदेन उपायुक्त कार्यालय में नियुक्त अन्य कर्मचारियों, डीआईटीएस ऑपरेटरों और एक चालक के जरिए किया है। अब एसीबी ने जांच का दायरा भी बढ़ा दिया है। एसीबी जांच में जुटी है कि ये रुपये किस एवज में लिए गए हैं।
जिन लोगाें ने शशांक शर्मा से रुपये का लेनदेन किया है, उनकी भी पहचान की जा चुकी है। उनको भी जल्द ही जांच में शामिल किया जाएगा। आरोपी व रुपये ट्रांसफर करने वालों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जाएगी। -मनोज कुमार, जांच अधिकारी, एंटी करप्शन ब्यूरो, रोहतक।