सोनीपत। स्वास्थ्य विभाग की ओर से डेंगू व मलेरिया की ओर से बचाव के लिए बेहतर कदम उठाने का दावा किया जाता है, लेकिन विभाग के पास स्टाफ का टोटा बना हुआ है।
मलेरिया विभाग के पास पर्याप्त संख्या में कर्मचारी ही नहीं हैं। जिले में मल्टीपर्पज हेल्थ वर्कर (एमपीएचडब्ल्यू), पंप मैकेनिक, सीनियर मलेरिया इंस्पेक्टर (एसएमआई) व सीनियर लैब तकनीशियन (एसएलटी) पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग डेंगू व मलेरिया पर कैसे शिकंजा कसेगा।
इस साल सोनीपत में अब तक डेंगू का एक केस मिल चुका है। वहीं, मलेरिया का कोई केस नहीं मिला है। आगे आने वाले समय में डेंगू व मलेरिया के केस मिलने की संभावना है।
इससे निपटने के लिए विभाग के पास एमपीएचडब्ल्यू का टोटा है। एमपीएचडब्ल्यू के 182 में से सात पद खाली पड़े हैं। गांव आनंदपुर झरोठ, नाथूपुर, किडोली, कुंडली, मलिकपुर, मनौली व पलडी में कोई भी एमपीएचडब्ल्यू नहीं है। एमपीएचडब्ल्यू फील्ड में रह कर डेंगू व मलेरिया से बचाव के लिए कार्य करते हैं। यहां तक की लोगों को जागरूक करना, चेकिंग व तालाबों में गंबूजिया मछली छोड़ने समेत अन्य कार्य इन्हीं को करना होता है।
वर्ष 2024 में जिले में डेंगू के 513 केस मिले थे। इस साल डेंगू का एक केस कंफर्म हो चुका है। वहीं गत वर्ष मलेरिया के 23 केस मिले थे।