बम भोले, बम भोले और भोले की फौज करेगी मौज जैसे नारों से जिले भर में माहौल शिवमय हो गया है। रविवार को भोले की फौज पूरी मौज में दिखाई दी। जिले की हर सड़क पर शिव भक्तों की टोलियां नजर आईं। विशेषतौर पर डाक कांवड़ियों की धूम पूरे जिले में रही। सुबह जहां आसपास के जिलों में जाने वाले डाक कांवड़िए सोनीपत-मेरठ रोड पर पहुंचे, वहीं दोपहर बाद जिले के डाक कांवड़िए पहुंच गए थे। हरिद्वार और गौमुख से हजारों शिव भक्त कांवड़ ला रहे हैं। सिलसिला देर शाम तक जारी रहा।
मंदिर सज कर तैयार
जिले भर में शिवलयों को रविवार देर शाम तक सजाकर तैयार कर दिया गया था। मंदिरों में लाइटों का विशेष प्रबंध किया गया। मुरथल रोड स्थित शिवधाम को विशेषतौर पर सजाया गया। इसके अलावा खरखौदा के छपड़ेश्वर मंदिर, गोहाना के शिवालयों तथा गन्नौर के शिव मंदिरों में भी विशेष सजावट की गई। कई मंदिरों में झांकियां भी तैयार की गई हैं।
दिन भर रही पुलिस मुस्तैद
कांवड़ियों की बढ़ी संख्या और दुर्घटना न होने से जहां पुलिस ने तीन दिन से जिले भर में पुलिस नाके लगाए गए थे। हाईवे और शहरों में विशेष तौर पर प्रबंध किए गए थे। वहीं, शिवरात्रि की पूर्व संध्या पर जिले भर में पुलिस पूरी तरह से मुस्तैद दिखाई दी। पुलिस ने सड़क किनारे वाहनों को खड़ा नहीं करने दिया।
डेढ़ लाख की लाए कांवड़
गोहाना। रविवार को उपमंडल के गांव रभड़ा निवासी शिव भक्त विशाल कांवड़ लेकर पहुंचे। इसे देखने के लिए लोगों का तांता लग गया। कांवड़ संचालक देवेंद्र शर्मा ने बताया कि उनके गांव के 16 शिव भक्त हरिद्वार से कांवड़ लेने के लिए 21 जुलाई को हरिद्वार गए थे। जहां से वे 27 जुलाई को 12 फीट चौड़ी और 15 फीट ऊंची कांवड़ लेकर चले और रविवार को गोहाना पहुंचे हैं। यह कांवड़ डेढ़ लाख रुपये की है। उन्होंने बताया कि गत वर्ष भी वे इसी तरह विशाल कांवड़ लेकर आए थे। कांवड़ लाने गए युवकों में सिंटू, राजेंद्र, चांद, मोहन, मोहित, भोला, हरीश, सुशील, अंकित, प्रदीप सरपंच, राजेश, ऋषि व मनीष शर्मा शामिल रहे।
मां 16वीं तो बेटी 17वीं कांवड़ लेकर पहुंची गन्नौर
गन्नौर। श्रावण मास में बोल बम के जयकारे लगाते हुए गन्नौर के कोट मौहल्ला निवासी कुसुम हरिद्वार से कांवड़ लेकर रविवार को गन्नौर पहुंची। यह उनकी 17वीं कांवड़ है। कुसुम वर्ष 2000 से लगातार हरिद्वार से कांवड़ ला रही है। उसके पैरों में न तो छाले पड़े हैं और न ही चेहरे पर थकान नजर आई। कुसुम का कहना है कि भोले बाबा का नाम लेकर वह हर वर्ष कांवड़ लेकर दौ सौ किलोमीटर का सफर पैदल तय करते हुए बिना किसी परेशानी के गन्नौर पहुंची है। कुसुम का कहना है कि जब तक भोले बाबा का आदेश होता रहेगा तब तक वह कांवड़ लाती रहेगी। कुसुम की मां निर्मला भी 16वीं कांवड़ लेकर गन्नौर पहुंची। इन दोनों के साथ छोटा बच्चा राहुल भी अपनी बुआ कुसुम और दादी निर्मला के साथ छठी कांवड़ लाया है। शिवभक्त निर्मला का कहना है कि यह भोले बाबा की ही शक्ति है कि 200 किलोमीटर का सफर बिना किसी तकलीफ के आराम से कट जाता है।
कांवड़ संग बेटी बचाओ और पेड़ लगाओ के लिए जागरूक कर रहा है प्रवीण
जहां सावन के मौसम में चारों तरफ सभी को भोले के गाने और जयकारे सुनाई देते हैं, यह युवक अपनी कांवड़ को सिर्फ लोगों में जागरूकता लाने के लिए लेकर आता है ताकि लोग जागरूक हो सके और बेटी को बचाने और पेड़ों को लगाने के लिए आगे आएं। फरमाणा गांव निवासी प्रवीण एक साधारण परिवार से है। गांव में ही उसकी किताबों की दुकान है। वह पिछले तीन साल से कांवड़ लेकर आता है। प्रवीण प्रत्येक वर्ष इस कांवड़ पर लगभग 21 हजार रुपये खर्च करता है। इसमें 11 हजार कांवड़ पर और 10 हजार आने जाने पर खर्च होता है। यह कांवड़ गांव के मंदिर में चढ़ती है।
पहले अकेला था अबकी बार मिले दो दोस्त
प्रवीण पहले अकेले ही कांवड़ को लेकर आता था लेकिन अबकी बार कृष्णा और देवेंद्र नाम के दो दोस्तों ने उसका साथ दिया। इसके बाद तीनों जहां पर भी रुकते हैं, लोगों को जागरूक करते आगे बढ़ते चलते हैं। इनके इस नेक अभियान में एक और दोस्त सोनू भी साथ दे रहा है।