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Sonipat News: तीन शुभ महासंयोग में आज मनाई जाएगी शनि जयंती और वट सावित्री व्रत

Thu, 06 Jun 2024 06:03 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
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सोनीपत। ज्येष्ठ माह में कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 6 जून को विशेष रूप से मनाई जाएगी। इस दिन वट सावित्री व्रत के साथ शनि जयंती भी मनाई जाती है। विशेष बात यह है कि इस दिन ग्रह-नक्षत्रों में तीन बड़े शुभ महासंयोग बन रहे हैं। जहां महिलाएं निर्जला व्रत रखकर अखंड सौभाग्य की कामना करेंगी, वहीं शनि भक्त प्रदोष काल में भगवान की विशेष पूजा-अर्चना करेंगे। इससे उन्हें विशेष फल की प्राप्ति होगी।
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चिटाना वाली माता मंदिर के पुजारी पंडित अमित शौनक ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर शनि जयंती मनाई जाती है। पौराणिक मान्यता है कि भगवान शनि देव का जन्म ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को हुआ था। इस दिन इनकी पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। यह न्याय के अधिपति देव हैं। शनि से जुड़े दोषों से राहत पाने के लिए ज्येष्ठ अमावस्या बहुत ही खास दिन होता है।
अमावस्या पर बन रहे ग्रहों के तीन शुभ महासंयोग
अमावस्या पर वीरवार को ग्रहों के तीन शुभ महासंयोग बन रहे हैं। इनमें गजकेसरी, बुधादित्य व धृति संयोग शामिल हैं। यह महासंयोग इस दिन को और शुभ बना रहे हैं। शनि का अपनी ही राशि कुंभ में होना बेहद शुभ रहेगा। शुभ संयोग में स्नानादि के बाद पूजा-अर्चना करने से पितरों को शांति मिलेगी। वीरवार शाम 4 से 6:30 बजे तक प्रदोष काल में शनिदेव की पूजा-अर्चना शुभ रहेगा।
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सुहागिनें रखेंगी वट सावित्री व्रत
वट सावित्री व्रत सुहागिनों के लिए खास दिन माना जाता है। इसी दिन सावित्री ने पूजा-अर्चना से यमदेव को प्रसन्न कर अपने पति सत्यवान के प्राणों की रक्षा की थी। यह व्रत पति की लंबी उम्र के साथ परिवार की सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। महिलाएं बरगद के पेड़ पर जल चढ़ाकर उसके तने पर कच्चा धागा लपेटती हैं। फिर वट वृक्ष की पूजा करती हैं। सौभाग्य और समृद्धि की कामना के लिए वृक्ष की परिक्रमा करती हैं। वट सावित्री व्रत के लिए सूर्योदय से लेकर शाम 6:07 बजे तक शुभ मुहूर्त रहेगा।
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वट सावित्री व्रत की पूजा विधि
-महिलाएं सुबह स्नान कर लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करें।

-वट वृक्ष के नीचे सावित्री और सत्यवान की प्रतिमा स्थापित करें।
-बरगद के वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करने के बाद पुष्प, भीगा चना, गुड़ व मिठाई चढ़ाएं।
-वृक्ष की 7 बार परिक्रमा करते हुए कच्चा सूत या कलावा लपेटें।

-शाम का कथा का श्रवण करें।
शनि जयंती की पूजा विधि व उपाय
- सुबह मंदिर में भगवान शनिदेव की प्रतिमा के समक्ष पूजा-अर्चना करें।
- शनि देव का सरसों के तेल से अभिषेक कर काले तिल, उड़द की दाल,नीले फूल व काले वस्त्र अर्पित करें।
- सरसों के तेल का दीपक जलाकर ऊँ शं शनैश्चराय नम: मंत्र का जाप करें, फिर भगवान शनि देव की आरती करें।


- जरूरतमंद, रोगी, दिव्यांग व असहाय लोगों की मदद करें और उन्हें भोजन खिलाएं।
- गऊ माता की सेवा करें और हरा चारा खिलाएं।
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