संवाद न्यूज एजेंसी
गोहाना। तहसील गोहाना और उपमंडल खानपुर कलां क्षेत्र में मानसून की धीमी रफ्तार किसानों के लिए चिंता का कारण बन गई है। मई से 20 जुलाई तक इन क्षेत्रों में केवल 205 एमएम बारिश दर्ज की गई है। यह पिछले पांच वर्षों में इसी अवधि का सबसे कम आंकड़ा है, जिससे खरीफ फसलों की पैदावार पर प्रतिकूल असर की आशंका है।
बारिश के आंकड़े वर्ष 2021 के बाद से लगातार गिरावट दिखा रहे हैं। वर्ष 2021 में कुल 2186 एमएम बारिश हुई थी। इसके बाद वर्ष 2022 में 1185 एमएम, 2023 में 1335 एमएम, 2024 में 636 एमएम और 2025 में 1183 एमएम बारिश दर्ज की गई। इस वर्ष मई में 52 एमएम, जून में 67 एमएम और जुलाई में 20 तारीख तक केवल 86 एमएम बारिश रिकॉर्ड हुई।
कम बारिश के कारण खेतों में नमी की कमी बनी हुई है। इससे धान सहित अन्य खरीफ फसलों की बढ़वार प्रभावित होने लगी है। किसानों को सिंचाई के लिए लंबे समय तक सबमर्सिबल पंप चलाने पड़ रहे हैं। यह बिजली की खपत बढ़ा रहा है और भूजल स्तर पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है।
कृषि विभाग के अधिकारी राजेंद्र प्रसाद मेहरा ने इस पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यदि आगामी दिनों में मानसून सक्रिय नहीं हुआ तो धान समेत खरीफ फसलों की बढ़वार प्रभावित होगी। भूजल स्तर और नहरी सिंचाई व्यवस्था पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने किसानों को मौसम की अगली गतिविधियों पर पूरी नजर रखने की सलाह दी।
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सिंचाई और भूजल पर असर
कम बारिश का असर केवल फसलों तक सीमित नहीं है। यदि मानसून सामान्य नहीं रहा तो नहरों में पानी की उपलब्धता भी प्रभावित हो सकती है। इससे किसानों का सिंचाई खर्च और बढ़ जाएगा। कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश बेहद आवश्यक है। पर्याप्त बारिश से धान की फसल को संजीवनी मिलेगी और भूजल स्तर पर दबाव कम होगा।