सोनीपत। जिले में फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए कड़ाई से निगरानी की जचा रही है। कृषि विभाग को सैटेलाइट से राई गांव के पास आग लगाने की लोकेशन मिली थी लेकिन जब विभाग की टीम मौके पर पहुंची तो पाया कि आग खेत में नहीं बल्कि राई औद्योगिक क्षेत्र की एक फैक्टरी में लगी थी।
इससे पहले जाटी कलां गांव से मिली लोकेशन भी जांच भी फर्जी पाई गई थी। दोनों ही घटनाओं की रिपोर्ट तैयार कर विभाग ने मुख्यालय भेज दी है। धान की कटाई शुरू होते ही खेत खाली करने के लिए कई किसान फसल अवशेष को जलाने लगते हैं जिससे वायु प्रदूषण बढ़ जाता है।
इस बार कृषि विभाग ने ऐसी घटना पर रोक लगाने के लिए ग्रामस्तर पर विशेष टीमें बनाई हैं। साथ ही सैटेलाइट से खेतों की निगरानी की जा रही है। राज्य सरकार ने आगजनी की घटना के आधार पर गांवों को तीन श्रेणियों-रेड, येलो और ग्रीन जोन में बांटा है।
जिले का कोई भी गांव रेड जोन में नहीं, एलो में 15 शामिल
इस बार सोनीपत जिले का कोई भी गांव रेड जोन में नहीं है। 15 गांव येलो जोन में शामिल किए गए हैं। इनमें गन्नौर ब्लॉक के बेगा, गन्नौर, कामी, पांची गुजरान, सैंया खेड़ा, राई ब्लॉक के जाटी कलां व खेवड़ा और सोनीपत ब्लॉक के मलिकपुर, मुरथल, जैनपुर आदि शामिल हैं।
पिछले साल 70 जगह मिली थी आगजनी की लोकेशन
पिछले खरीफ सीजन में जिले में सैटेलाइट के माध्यम से 70 जगह आग लगाने की लोकेशन मिली थी। 17 स्थानों पर खेतों में आग लगी हुई पाई गई थी। इस बार अब तक सिर्फ दो लोकेशन सामने आई हैं। दोनों ही झूठी पाई गई हैं। कृषि विभाग का लक्ष्य है कि इस बार खेतों में आग लगाने की घटना को शून्य किया जाए। इसके लिए अन्य विभागों को भी अभियान से जोड़ा गया है।
आग लगाने पर जुर्माना और एफआईआर
कृषि विभाग ने चेतावनी दी है कि पराली जलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
-2 एकड़ तक पराली जलाने पर 5,000 रुपये जुर्माना लगाया जाएगा।
-5 एकड़ तक की पराली जलाने पर 10,000 रुपये जुर्माना लगाया जाएगा।
-5 एकड़ से अधिक पर 30,000 रुपये तक जुर्माना और एफआईआर भी दर्ज की जा सकती है।
-विभाग पूरी तरह सतर्क है। सैटेलाइट के माध्यम से खेतों की निगरानी की जा रही है। अब तक मिली दोनों लोकेशन में फसल अवशेष में आग नहीं लगी थी। किसानों से अपील है कि खेतों में आग लगाने के बजाय फसल अवशेष प्रबंधन के उपाय अपनाएं ताकि पर्यावरण और मिट्टी दोनों सुरक्षित रहें। -डॉ. पवन शर्मा, कृषि उपनिदेशक, सोनीपत।