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प्रदेश की बोली को भाषा बनाने पर कार्य करें संस्कृत विश्वविद्यालय : मंत्री ढांडा

Thu, 20 Feb 2025 01:28 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
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फोटो 17- सोनीपत के मुरथल स्थित डीसीआरयूएसटी में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू करने के लिए
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सोनीपत। शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति को सुझाव दिया है कि हरियाणवी बोली को भाषा कैसे बनाया जाए, इस दिशा में काम करना चाहिए। इससे प्रदेश के गौरवशाली संस्कृति व साहित्य को लिपिबद्ध किया जाना संभव हो सकेगा। शिक्षा मंत्री ढांडा बुधवार को दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मुरथल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन को लेकर प्रदेश के विश्वविद्यालयों की आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
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शिक्षा मंत्री ढांडा ने कहा, हरियाणा देश में पहला राज्य है जिसने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को 2025 तक लागू करने की पहल की है, जबकि केंद्र सरकार ने राज्यों को इसे वर्ष 2030 तक लागू करने का लक्ष्य दिया है। कहा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने के लिए प्रदेश के विश्वविद्यालयों की तरफ से बेहतर कार्य किया जा रहा है। हरियाणा उच्चतर शिक्षा परिषद के साथ मिलकर सभी कुलपति गंभीरता के साथ कार्य करें, ताकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को पूर्ण रूप से तय समय पर लागू किया जा सके। हमारे पास हर विषय के विशेषज्ञ हों, इस पर सबको मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है।
प्रदेश की संस्कृति पर कार्य करने के लिए कहा
मंत्री ने सुपवा के कुलपति से कहा, जिस प्रकार पंजाब व देश के दक्षिणी राज्यों ने वहां की संस्कृति, कला, वाद्ययंत्र व लोक संगीत पर कार्य किया है, उसी प्रकार से प्रदेश के विश्वविद्यालयों को भी हरियाणा की संस्कृति, कला, वाद्ययंत्र व लोक संगीत पर कार्य करना चाहिए।
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विश्वविद्यालय उद्योगपतियों के साथ मिलकर पाठ्यक्रम बनाएं

उच्चतर शिक्षा व तकनीकी शिक्षा के अतिरिक्त प्रधान सचिव विनीत गर्ग ने कहा कि देश को विकसित राष्ट्र बनाने में राष्ट्रीय शिक्षा नीति का अहम योगदान होगा। विश्वविद्यालयों को उद्योगपतियों के साथ बैठक कर ऐसा पाठ्यक्रम बनाना चाहिए, जिससे हमारे उद्योगों की आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके। बैठक में उच्चतर शिक्षा महानिदेशक राहुल हुड्डा, प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा, डीसीआरयूएसटी मुरथल के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह, डीपी भारद्वाज, मुकेश गर्ग, तकनीकी शिक्षा व उपाध्यक्ष प्रो. एसके गखड़ आदि मौजूद रहे।
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