सोनीपत। सेक्टरों के एन्हांसमेंट की री-कैल्कुलेशन को लेकर विवाद बढ़ता दिख रहा है। जहां सीएम के नोटिफिकेशन के आधार पर एन्हांसमेंट की री-कैल्कुलेशन हुई थी और फाइलों पर केवल एचएसवीपी के सीए की मुहर लगनी बाकी थी। वहीं अब सीए के मौखिक आदेश पर उन फाइलों को अफसरों ने दबा दिया है और अब उन फाइलों पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिससे सेक्टर के प्लॉट धारकों का गुस्सा दोबारा से भड़कने लगा है और अब आरडब्ल्यूए ने दोबारा से आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है। आरडब्ल्यूए ने यह आंदोलन पहले की तरह से प्रदेश स्तर पर शुरू करने की बात कही है, जिससे री-कैल्कुलेशन को मंजूरी दिलाई जाए।
एचएसवीपी ने शहर के सेक्टर 14, 12, 15 पार्ट एक, पार्ट दो व सेक्टर 23 में वर्ष 2017 से पहले एन्हांसमेंट भेजी थीं। वह एन्हांसमेंट काफी ज्यादा भेज दी गई थी, जिसके विरोध में सेक्टरों के लोगों ने आंदोलन शुरू कर दिया था। इस मामले को लेकर ऑल सेक्टर रेजिडेंस वेल्फेयर एसोसिएशन के पदाधिकारी सीएम, प्रमुख सचिव, मुख्य प्रशासक से मिले थे। वेल्फेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने एन्हांसमेंट को गलत बताया था और कहा था कि सेक्टरों में जितने भी स्कूल, पुलिस चौकी, वाटर वर्क्स, हुडा कार्यालय समेत अन्य सरकारी भवन बने हुए हैं, उनकी एन्हांसमेंट भी प्लॉट धारकों पर डाल दी गई है। इसके अलावा सेक्टरों में एन्हांसमेंट के आदेश कोर्ट से कई साल पहले हो गए थे, जबकि प्लॉट धारकों को नोटिस कई साल बादस ब्याज लगाकर भेज दिए गए थे। इस तरह वह ब्याज गलत लगाया गया था और इस कारण ही एन्हांसमेंट इतनी बढ़ गई थी कि वह प्लॉट की कीमत से ज्यादा हो गई थी। इस पूरे मामले में सीएम मनोहर लाल ने रि-कैल्कुलेशन कराने के आदेश दिए थे, जिसके लिए पॉलिसी बनाई गई थी और उसका नोटिफिकेशन जारी करके री-कैल्कुलेशन एक साल पहले शुरू हुई थी। इस री-कैल्कुलेशन की फाइल तैयार करके जोनल कार्यालय रोहतक में भेजा गया था, जहां जोनल प्रशासक व ऑडिटर ने पूरा ड्राफ्ट भी तैयार कर दिया था। इसको लेकर ही एचएसवीपी के मुख्य प्रशासक ने रोहतक प्रशासक के अलावा सभी जिलों के एस्टेट ऑफिसर व सीए के साथ दस दिन पहले मीटिंग की थी। वहां मुख्य प्रशासक ने नोटिफिकेशन के आधार पर की गई री-कैल्कुलेशन को गलत बताते हुए नए तरीके से उसे दोबारा करने के लिए मौखिक आदेश दिए थे। जिसके बाद एस्टेट ऑफिसरों ने फाइलों को दबा दिया और इसमें अब कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। ऑल सेक्टर रेजिडेंस वेल्फेयर एसोसिएशन के महासचिव मोहन सिंह मनोचा ने आरोप लगाया कि सीएम की ओर से जारी कराया गया नोटिफिकेशन की जगह एचएसवीपी के अफसर अपने विभाग के मुख्य प्रशासक के मौखिक आदेश को मान रहे है। इस तरह से मौखिक आदेश पर एन्हांसमेंट की री-कैल्कुलेशन की फाइलों को दबा दिया गया है और अब उनमें कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इस तरह से दो साल से चल रहा एन्हांसमेंट का मामला दोबारा से दबाकर प्लॉट धारकों को परेशान किया जा रहा है।
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इस तरह मौखिक आदेश मिलने पर दबा दी गई सभी फाइल
जब सेक्टर के लिए जमीन का अधिगृहण किया जाता है तो जमीन मालिक को प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिया जाता है। उसके बाद जमीन मालिक सिविल कोर्ट में केस करता है और वहां से एन्हांसमेंट आने पर उस राशि पर केस के समय से फैसले तक का ब्याज लगाकर प्लॉटधारकों को नोटिस भेजा जाता है। जिससे प्लॉट धारक जमा कर सके। उसके बाद भी किसान असंतुष्ट होकर हाईकोर्ट में चला जाता है तो वहां से एन्हांसमेंट आती है तो सिविल कोर्ट की एन्हांसमेंट राशि को उसमें से कम करके हाईकोर्ट में दायर किए गए केस के समय से फैसले तक के समय का ब्याज लगाकर नोटिस भेजे जाते है। इस तरह ही सुप्रीम कोर्ट से जारी एन्हांसमेंट में होता है, जिसमें से सिविल कोर्ट व हाईकोर्ट से जारी एन्हांसमेंट की राशि को कम करके बाकी पर ब्याज लगाकर नोटिस जारी किए जाते है। लेकिन सीए ने अब सुप्रीम कोर्ट से जारी एन्हांसमेंट पर सिविल कोर्ट में दायर किए गए केस के समय से ब्याज लगाकर री-कैल्कुलेशन करने के लिए कहा है। जिसे आरडब्ल्यूए पूरी तरह से गलत बता रहा है, लेकिन इसके साथ ही आरडब्ल्यूए ने यह भी विरोध शुरू कर दिया है कि री-कैल्कुलेशन की फाइलों को केवल सीए के मौखिक आदेश पर दबा दिया गया है। अगर कोई लिखित आदेश सीए की ओर से होता तो उसपर अफसर कार्रवाई कर सकते थे, लेकिन इस तरह बिना लिखित आदेश के फाइलों को दबाना गलत है।
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सेक्टरों के एन्हांसमेंट की री-कैल्कुलेशन की फाइलों को तैयार करके यहां से रोहतक प्रशासक कार्यालय में भेज दिया गया था। इस मामले में री-कैल्कुलेशन को लेकर पेंच उलझ गया है। जिसमें सेक्टर के लोगों की अलग तरह से रि-कैल्कुलेशन की बात कह रहे है तो अधिकारी अलग तरह से कह रहे है। यह मामला अभी चल रहा है और री-कैल्कुलेशन का मामला जल्द ही खत्म कर दिया जाएगा।
-विजय राठी, एस्टेट ऑफिसर एचएसवीपी
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एन्हांसमेंट के पूरे मामले को देखने के बाद सीएम मनोहर लाल ने रि-कैल्कुलेशन के लिए नोटिफिकेशन जारी कराया था। उस नोटिफिकेशन के आधार पर री-कैल्कुलेशन हुई है और हर कोई उसे सही बता रहा है। लेकिन मुख्य प्रशासक ने उसे गलत बताते हुए फाइलों को रुकवा दिया है और इस तरह केवल 12 दिन से फाइलों को दबाकर रखा हुआ है। इसमें अब कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इस कारण ही पूरे प्रदेश की आरडब्ल्यूए से बात की गई है और इसमें कुछ नहीं हुआ तो आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।
-मोहन सिंह मनोचा, महासचिव ऑल सेक्टर रेजिडेंस वेल्फेयर एसोसिएशन