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350 करोड़ की सड़कों पर ग्रीन टैक्स का बोझ

Sat, 14 Nov 2015 12:45 AM IST
दीपक वर्मा /अमर उजाला सोनीपत
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बदहाल सड़कों की मार झेल रहे सोनीपत जिले के लोगों के लिए दिल्ली के ग्रीन टैक्स ने स्थिति और भी बेहाल कर दी है। भारी वाहनों की बढ़ती संख्या के बीच शहर को बाईपास करने वाली सड़कों पर जाम की स्थिति बनी रहती है। यहां ओवरलोड वाहनों के कारण हुडा, पीडब्ल्यूडी और एचएसआरडीसी के लगभग 350 करोड़ रुपये की लागत से बनाई सड़कों का नुकसान हो रहा है।
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यूपी के सीमावर्ती इलाकों से आने वाले भारी वाहन भी अब सोनीपत को जरिया बनाकर गुड़गांव-फरीदाबाद पहुंच रहे हैं। इसके अलावा जो भारी वाहन अंबाला की ओर से आते हैं, वे भी सोनीपत की सड़कों का दम निकालते हुए आगे बढ़ रहे हैं। इन्हीं ओवरलोडेड वाहनों के चलते हुडा को अपनी सड़क की विशेष मरम्मत भी करवानी पड़ी है।

मुरथल से सोनीपत रोड
40 करोड़ की सड़क : एचएसआरडीसी ने 6 साल पहले लगभग 40 करोड़ रुपये की लागत से इस सड़क को फोनलेन किया गया था। अंबाला की तरफ से आने वाले सभी भारी वाहन इसी रोड के जरिए शहर में प्रवेश करते हैं।
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बहालगढ़ से सोनीपत रोड
174 करोड़ से बनाया फोरलेन : पिछले वर्ष ही 174 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि खर्च कर बहालगढ़ से सोनीपत रोड को एचएसआरडीसी ने फोर लेन किया था। इससे पहले सड़क टू लेन थी। यूपी की ओर से आने वाले व्हीकल बहालगढ़ पहुंचने के बाद इसी रास्ते से महाराणा प्रताप चौक तक पहुंचते हैं।

अग्रसेन चौक से प्रताप चौक तक सेक्टर 14-15 का डिवाइडर रोड
पांच साल में खर्चे 4.40 करोड़ : मुरथल से महाराजा अग्रसेन चौक तक पहुंचने के बाद भारी वाहन सेक्टर 14-15 के इस डिवाइडर रोड से मुख्य शहर को बाईपास करते हुए महाराणा प्रताप चौक तक पहुंचते हैं। सेक्टर की प्लानिंग के समय इस सड़क को एक करोड़ की लागत से हुडा ने बनवाया गया था। पांच साल पहले भी इस सड़क को 1.70 करोड़ की लागत से स्पेशल रिपेयर किया था। अब फिर इसे लगभग इतनी ही लागत से फिर से स्पेशल रिपेयर किया जा रहा है।

प्रताप चौक से आईटीआई चौक तक सेक्टर-12 का आउटर रोड
दोनों तरफ की लाइफ लाइन बना आउटर रोड : वाहन चाहे बहालगढ़ से आए या मुरथल से शहर को बाईपास करने के लिए, महाराणा प्रताप चौक से आईटीआई चौक तक के सेक्टर-12 का आउटर रोड ही काम आता है। यह आउटर रोड भी हुडा का ही है। इस आउटर रोड को 55 लाख की लागत से प्लानिंग के समय तैयार किया गया था। गत दिनों ही 1 करोड़ की स्पेशल रिपेयर भी करवाई गई है।

गढ़ मिर्कपुर से बहालगढ़, आईटीआई चौक से सांपला बॉर्डर तक एनएच-334बी
एनएच-334 बी पर बढ़ा वजन : इस नेशनल हाइवे के कारण ही सोनीपत की सड़कें दम तोड़ रही हैं। यह हाईवे वैसे तो मेरठ से शुरू होकर लोहारू तक जाता है, लेकिन सोनीपत में यह गढ़ मिर्कपुर से सांपला बॉर्डर तक चलता है। बीच में दो सड़कें हुडा और एचएसआरडीसी के अंतर्गत आती हैं। किसी समय में यह सड़क हिस्सों में बंटकर 50 करोड़ में तैयार हुई थी। अब इस पर 10 करोड़ रुपये की राशि से विशेष मरम्मत का काम पीडब्ल्यूडी करवा रही है।

ट्रक यूनियन से सेक्टर-12 का आउटर रोड (ड्रेन नंबर 6 तक)
बहालगढ़ से आने वालों के लिए दूसरा रास्ता : बहालगढ़ से आने वाले भारी वाहनों के लिए एक दूसरा रास्ता भी है। ट्रक यूनियन के साथ से सेक्टर-12 के आउटर रोड तक जाने वाले इस सड़क को लगभग 25 लाख की लागत से तैयार किया गया था। हाल ही में लगभग इतनी ही लागत से इसको रिपेयर करवाया गया है।

रोहतक रोड रेलवे ओवरब्रिज
भजनलाल के समय में बना था : प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के समय में रोहतक रोड आरओबी बनाया गया था। उस समय लगभग 10 करोड़ की लागत से पुल तैयार हुआ था। अब इस पुल को चौड़ा करने का काम लगभग 22 करोड़ रुपये से जारी है।

आम आदमी की तीन दिक्कतें, विभाग की दो : एक्सपर्ट व्यू
मौजूदा समय में आम आदमी को तीन दिक्कतें हैं। एक तो उनकी सुविधा के बनाई गई सड़कें टूट रही हैं। दूसरा नुकसान भारी वाहनों के चलते वातावरण में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। तीसरा नुकसान बहालगढ़ और मुरथल से लेकर कालूपुर चुंगी तक लगभग हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। विभाग की बात करें तो जो करोड़ों रुपये सड़कों पर लगाए हैं, वे बर्बाद हो रहे हैं। आमतौर पर विभाग पांच साल में सड़क बनाता है, लेकिन अब ये समय भी घट रहा है।
अनिल दहिया, एएसडीओ, पीडब्ल्यूडी

ग्रीन टैक्स क्या और कितना
सेंटर ऑफ साइंस एंड इन्वायरमेंट की स्टडी में बताया गया था कि दिल्ली पहुंचने वाले 23 प्रतिशत कामर्शियल वाहन ऐसे हैं, जिनकी मंजिल दिल्ली नहीं है। इनमें लगभग 60 प्रतिशत भारी वाहन हैं। कोर्ट के आदेशों के बाद दिल्ली में दाखिल होने वाली सभी सड़कों पर ग्रीन टैक्स वसूला जाने लगा है। इसके तहत सात सौ से 13 सौ रुपये तक वसूली की जा रही है। यह राशि टोल टैक्स से अलग रहेगी।

- विभाग की ओर से पहले भी भारी वाहनों का आवागमन बंद करवाने के लिए डीएसपी को पत्र लिखा गया था। भारी वाहनों के चलते हमारी लगभग 7 करोड़ रुपये की सड़कें बर्बाद हो रही हैं।
दीपक गोयल, एक्सईएन, हुडा

लगभग 250 करोड़ रुपये की सड़कें दम तोड़ रही हैं। हालांकि सड़कों का डिजाइन भारी वाहनों का है, लेकिन जो वाहन गुजरते हैं, वे ओवरलोड होते हैं। इस कारण सड़कें खराब हो रही हैं।
जगबीर सिंह काजला, डीजीएम, एचएसआरडीसी

लगभग 60 करोड़ रुपये सड़कों पर और 30 करोड़ रुपये रोहतक रोड आरओबी पर खर्च हुए हैं। आरओबी पर तो अभी काम चल भी रहा है। सभी सड़कों और आरओबी की भारी वाहनों ने कमर तोड़ दी है।
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एके गोयल, एसई, पीडब्ल्यूडी
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