फोटो 01- सोनीपत जिला कारागार में आध्यात्मिक कार्यक्रम के दौरान प्रवचन करते राष्ट्रीय रत्न गुरुद
सोनीपत। मनुष्य गलती कर सकता है लेकिन वह उसका भविष्य तय नहीं करती। भविष्य वही तय करता है कि व्यक्ति अपनी भूल से क्या सीख लेता है। आगे किस मार्ग पर चलता है। आत्म ज्ञान, संयम व क्षमा ही जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं। यह विचार वीरवार को जिला कारगार में आयोजित आध्यात्मिक कार्यक्रम में राष्ट्रीय रत्न गुरुदेव उपेंद्र मुनि महाराज ने व्यक्त किए।
उन्होंने बंदियों से नशा, क्रोध, हिंसा व नकारात्मकता से मुक्त होकर नए संकल्पों के साथ जीवन जीने का आह्वान किया। कार्यक्रम जेल प्रबंधन की सकारात्मक सुधार-सकारात्मक समाज पहल के तहत आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य बंदियों के मनोबल को बढ़ाना व उन्हें नई दिशा प्रदान करना है।
उपेंद्र मुनि महाराज ने प्रवचन के माध्यम से बंदियों को जीवन सुधार, आध्यात्मिक जागृति, आत्मविश्वास के मार्ग पर प्रेरित किया। उपेंद्र मुनि महाराज ने श्रीमद्भगवद्गीता, जैन दर्शन व जीवन के व्यावहारिक प्रसंगों का उदाहरण देते हुए समझाया कि हर मानव के अंदर परिवर्तन की अपार क्षमता होती है।
जेल केवल दंड का स्थान नहीं बल्कि आत्म मंथन व आत्म परिवर्तन की भूमि है। जेल की चहारदीवारी को बाधा नहीं बल्कि एक नए जीवन की तैयारी का स्थान मानें। अपने परिवार, समाज के लिए सकारात्मक सोच व अच्छे आचरण के साथ आगे बढ़ें।
गुरुदेव उपेंद्र मुनि ने बंदियों से संवाद करते हुए उन्हें मानसिक दृढ़ता बढ़ाने, ध्यान व प्रार्थना को दैनिक जीवन में शामिल करने का मार्गदर्शन दिया। डिप्टी जेलर दीपक हुड्डा ने बताया कि ऐसे आध्यात्मिक व प्रेरणादायी कार्यक्रम बंदियों में आत्मविश्वास, नैतिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।