फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘आरक्षण का आधार जातीय नहीं आर्थिक हो’

Sun, 30 Aug 2015 12:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सोनीपत
विज्ञापन
विज्ञापन
भारतीय किसान संघ के प्रदेश महामंत्री वीरेंद्र बढ़खालसा ने कहा कि आजादी के 70 वर्ष बाद भी आरक्षण ने देश को जातियों में बांटने का काम किया है। यह जातीय पर न होकर आर्थिक पर होना चाहिए।
विज्ञापन


वे शनिवार को एटलस रोड स्थित एक निजि रेस्तरां में पत्रकारों को बातचीत कर रहे थे। उन्होंने रक्षाबंधन पर्व पर समाज के गरीब दबे कुचले वर्ग की हिमायत करते हुए उसकी रक्षा करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

वीरेंद्र बढ़खालसा ने कहा आज आरक्षण की वजह से पूरे देश में एक गृहयुद्ध जैसा माहौल बन गया है। आरक्षण से तात्पर्य था कि समाज के उस वर्ग की रक्षा की जाए जो किसी कारण पिछड़ गया था। समाज में जाति व्यवस्था कार्यकुशलता के आधार पर थी। धीरे-धीरे वर्ण व्यवस्था जातिगत व्यवस्था हो गई।
विज्ञापन


देश के स्वतंत्र होने के बाद वोट बैंक के रूप में सरकार ने इसे देखना शुरू कर दिया। आजादी के 70 वर्ष बाद भी जातीय आरक्षण पर हम लड़ते रहे तो यह अच्छा नहीं है। संघ की ओर से सरकार से मांग की गई कि आरक्षण जातीय आधार पर न होकर आर्थिक आधार पर होना चाहिए।

आज प्रत्येक जाति में अमीर व गरीब की खाई बहुत अधिक गहरी हो चुकी है। अमीर और अमीर हो गया और गरीब और अधिक गरीब हो गया। आरक्षण लेकर जिन परिवारों ने उन्नति की है उन्हें अब आरक्षण से बाहर कर देना चाहिए।

यह केवल वास्तविक हकदारों को मिलना चाहिए। इस मौके पर संघ के जिलाध्यक्ष ताहिर सिंह, जगदीश दहिया, रमेश दहिया, प्रवीण, कंवल सिंह, अजय मलिक व भारत भूषण भी मौजूद रहे।
विज्ञापन


और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें