परिजन उनके शव को पोस्टमार्टम करवाने के लिए पोस्टमार्टम हाउस (शव विच्छेदन गृह) में फ्रीजर के अंदर रखकर चले गए। गुरुवार सुबह जब परिजन अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए पहुंचे तो उन्हें पता लगा कि राजेंद्र के शव को आंख व पैर के पास से चूहों ने कुतर दिया है। जिससे खून बह रहा है।
उन्होंने शव की बेकद्री को लेकर हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने मामले में लापरवाही बरतने वाले कर्मी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। जिस पर सीएमओ डॉ. जसवंत पूनिया व पीएमओ डॉ. जयभगवान मौके पर पहुंचे और जांच कराकर कार्रवाई का आश्वासन दिया। जिसके बाद शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही बुजुर्ग की मौत के कारणों का पता लग सकेगा। कुंडली धरनास्थल पर अब तक 19 किसानों की मौत हो चुकी है।
देर रात परिजन व इकलौता बेटा पोस्टमार्टम हाउस में रखवाकर गए थे शव
किसान राजेंद्र के इकलौते बेटे प्रदीप ने बताया कि वह बुधवार देर रात को शव को पोस्टमार्टम हाउस में फ्रीजर के अंदर रखकर गए थे। सुबह जब पहुंचे तो शव से खून निकल रहा था। उन्होंने देखा कि उनकी आंख व पैर पर चूहे के कुतरने से बड़े घाव बने थे। खून भी बह रहा था। उसके बाद ग्रामीण व सरोहा खाप के प्रतिनिधि अस्पताल में बिफर गए और हंगामा किया।
पोस्टमार्टम हाउस में शव को चूहों द्वारा कुतरने व ग्रामीणों के हंगामे के बाद सीएमओ व पीएमओ मौके पर पहुंचे थे। मामले में पीएमओ डॉ. जयभगवान ने बताया कि मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। जिसमें डॉ. सुशील जैन, डॉ. संदीप लठवाल व डॉ. गिन्नी लांबा को शामिल किया गया। जिनकी रिपोर्ट पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं डॉ. संदीप लठवाल ने कहा पोस्टमार्टम हाउस में ड्यूटी देने वाले सभी कर्मियों के बयान दर्ज किए जाएंगे। जिसके आधार पर पता लग सकेगा कि किसकी लापरवाही थी।
फूलों से सजी गाड़ी पर तिरंगे लगाकर गांव में लेकर गए किसान का शव
सोनीपत सामान्य अस्पताल में पोस्टमार्टम करवाने के बाद किसान राजेंद्र सरोहा का शव ग्रामीण फूलों से सजी गाड़ी में रखकर गांव में लेकर पहुंचे। गाड़ी को फूलों से सजाने के साथ ही उस पर तिरंगे लगाए गए थे। इस दौरान उनके शव पर फूल मालाएं चढ़ाई गई। ग्रामीण व सरोहा खाप के सदस्य राजेंद्र सिंह अमर रहे व शहीद राजेंद्र सिंह के नारे लगाते हुए चल रहे थे। किसानों ने उन्हें शहीद बताते हुए कृषि कानूनों को रद्द किए जाने तक आंदोलन को जारी रखने की बात कही।
अपने समय में अखाड़े के उत्कृष्ट पहलवान थे राजेंद्र सरोहा
राजेंद्र सरोहा के बेटे प्रदीप ने बताया कि उनके पिता अपने समय के उत्कृष्ट पहलवान थे। वह अखाड़ों में जाकर दंगल लड़ा करते थे। उन्होंने कई दंगलों में जीत दर्जकर गांव व जिले का नाम रोशन किया। किसानों की मांग पूरी कराने के लिए उनके पिता ने अपना जीवन न्योछावर कर दिया।