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राशन कार्ड नहीं हुए स्मार्ट, प्रोजेक्ट खटाई में

Fri, 19 Dec 2014 12:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
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जिले में राशन कार्ड की जगह स्मार्ट कार्ड बनाए जाने की योजना को लेकर शुरू किया गया पायलट प्रोजेक्ट अब खटाई में पड़ता नजर आ रहा है। इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की रणनीति पर अब खाद्य एवं आपूर्ति विभाग में संशय बना हुआ है। इस स्थिति में अब न तो नए राशन कार्ड बनाने का काम हो रहा है और न ही स्मार्ट कार्ड का। इससे राशनकार्ड धारकों के बीच असमंजस की स्थिति है। गौरतलब है कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत सोनीपत तहसील में वर्ष 2011 में राशन कार्ड की जगह स्मार्ट कार्ड बनाने की शुरुआत की गई थी। इसमें तहसील के कुल 69 गांवों को शामिल किया गया था।
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2005 में बनाए गए थे नए राशन कार्ड
वर्ष 2005 में नए राशन कार्ड बनाए गए थे। उसके बाद पांच साल की अवधि बीत गई तो वर्ष 2011 में फिर इन राशन कार्डों में एक साल की तालिका जोड़ने की योजना बनाई गई। नियम के मुताबिक एक बार राशन कार्ड बनाने के बाद पांच साल दोबारा राशन कार्ड बनाया जाता है।

 मगर इसी बीच खाद्य आपूर्ति विभाग राशन कार्ड की पुरानी परिपाटी को छोड़कर स्मार्ट कार्ड और आधार कार्ड बनाने की महत्वाकांक्षी योजना को ले आया। विभाग ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए प्रदेश के अंबाला, सोनीपत, सिरसा और करनाल और घरौड़ा खरौड़ा ब्लॉक में स्मार्ट कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू की थी। शुरुआती दौर में काम तेजी से चला, लेकिन बाद में पूरी तरह ठप हो गया। इसलिए पुराने राशन कार्डों में ही नई तालिका जोड़कर फिलहाल राशन देने की सुविधा दी जा रही है। नई व्यवस्था कायम होने तक सरकारी राशन की दुकान पर रियायती दरों पर सामान लेने के लिए पुराने राशन कार्ड का ही प्रयोग किया जा रहा है।
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क्या थी बनाने की वजह
अब इस प्रोजेक्ट को खत्म कर नए राशन कार्ड बनाने का कार्य नए साल के जनवरी महीने से किया जाएगा। स्मार्ट कार्ड बनाने की वजह यह थी कि डिपो होल्डर धांधलेबाजी नहीं कर सके ताकि लोगों को राशन सही तरीके से मिल सके।

क्या हैं स्मार्ट कार्ड बनाने के फायदे
स्मार्ट कार्ड बनाने का ठेका वैकरेंज लिमिटेड कंपनी को दिया गया है। इस स्मार्ट कार्ड के इस्तेमाल के लिए सभी डिपो होल्डर को बायोमिट्रिक मशीन (पोज मशीन) दी गई। इधर, कंपनी ने गांव-गांव जाकर कैंप लगाकर लोगों के स्मार्ट कार्ड बनाए। जिसका आंकड़ा कंप्यूटर में फीड किया गया।

अब अगर कोई राशनधारक राशन लेने दुकान पर जाता है तो डिपो होल्डर उसके कार्ड को मशीन में स्वैप कर यह जान जाएगा कि वह उपभोक्ता फर्जी तो नहीं है। इधर, डिपो होल्डर की मनमानी पर रोक लगाने के लिए हर महीने बाद मशीन को अपडेट कराने के लिए विभाग ले जाना पड़ेगा। इस तरह राशन वितरण के काम में पूरी तरह पारदर्शिता आ जाएगी।

कंपनी के एसोसिएटेड एक्जीक्यूटिव जोगेंद्र सिंह का कहना है कि वर्तमान में लगभग 42 हजार स्मार्ट कार्ड बनाए जा चुके हैं। यानी लगभग 90 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है। जब नए आदेश नहीं आ जाते तब तक आगे का काम शुरू नहीं किया जाएगा।

जिला खाद्य एवं आपूर्ति अधिकारी राजेश कुमार से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि इस बारे में फिलहाल कोई सूचना नहीं आई है। जैसे ही कोई नई सूचना आती है उसके बाद ही उस पर अमल करना शुरू किया जाएगा।
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