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राम मंदिर केस में सबूत पेश करने को सोनीपत की वकील ने किया था रिसर्च

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वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ शिवानी तुषीर। - फोटो : Sonipat
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राम मंदिर केस में सबूत पेश करने को सोनीपत की वकील ने किया था रिसर्च
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-सोनीपत के गढ़ी ब्राह्मणान की अधिवक्ता शिवानी तुषीर ने हाईकोर्ट का फैसला भी इलेक्ट्रानिक मोड़ में किया था तैयार
-वकील शिवानी तुषीर ने वरिष्ठ अधिवक्ता के. पाराशरन व सीएस वैद्यनाथन की सहायक के रूप में किया काम
-शिवानी ने मामले से जुड़े सभी पुराने मामलों पर की रिसर्च, राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बताया संतुलित
फोटो : 33 : अधिवक्ता शिवानी तुषीर।
फोटो : 34 : वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ शिवानी तुषीर।
अमर उजाला ब्यूरो
सोनीपत। अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। राम मंदिर केस में रामलला पक्ष की तरफ से सोनीपत की अधिवक्ता शिवानी तुषीर ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। कोर्ट में पेश किए सबूत को लेकर सोनीपत की अधिवक्ता ने रिसर्च किया था। इतना ही नहीं मामले को लेकर आया हाईकोर्ट का फैसला भी उन्होंने इलेक्ट्रानिक मोड़ में तैयार किया था। जिसमें एक क्लिक करते ही पूरा डाटा स्क्रीन पर आ जाता था। जिससे केस की तैयारी में काफी मदद मिली थी। उन्होंने अयोध्या केस के फैसले को सभी के लिए संतुलित बताया है।
अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हर तरफ इसे लेकर ही चर्चा है। हिंदू पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन व के. पाराशरन की सहयोगी अधिवक्ता के रूप में सोनीपत के गढ़ी ब्राह्मणान की शिवानी तुषीर ने भी इसे लेकर कड़ी मेहनत की थी। शिवानी तुषीर बताती हैं कि उन्होंने अपने सीनियर अधिवक्ताओं के निर्देश अनुसार मामले को लेकर पुराने सभी केसों का रिसर्च किया था। उन्होंने माना कि इस केस के लिए लाखों रुपये की किताबें खरीदी र्गइं। जिसमें सैकड़ों किताबों का बरीकी से अध्यनन किया गया। धार्मिक मामलों से जुड़ी किताबों को बारीकी से पड़ा गया। उन्होंने माना कि वह रिसर्च के लिए पुराने मामलों की किताब पढ़ती थीं। उन्होंने कहा कि उनके पक्ष के अधिवक्ताओं ने बाबरनामा, आईने अकबरी, पवित्र कुरान तक पढ़ी। छोटे-छोटे बिंदुओं को सारबद्ध किया गया। वह केस के लिए मुख्य रूप से पुराने मामले ही सर्च करती थीं। जिनसे केस की सुनवाई के दौरान काफी मदद मिली। उन्होंने कहा कि 2 अगस्त को मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 6 अगस्त से प्रतिदिन मामले की सुनवाई की जाएगी। इसके बाद से पूरी टीम के लिए कोर्ट और ऑफिस में केस की तैयारी ही प्राथमिकता बनकर रह गई। यहां तक की खानपान भी कार्यालय में होता था। यहां तक की उनके साथी अधिवक्ताओं ने चार लेखकों द्वारा लिखित कुरान का बारीकी से अध्ययन किया।
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हाईकोर्ट का फैसला भी इलेक्ट्रानिक मोड़ में किया था तैयार
शिवानी तुषीर बताती हैं कि अयोध्या मामले को लेकर हाईकोर्ट ने अपना फैसला दिया था। वह फैसला करीब आठ हजार पेज का था। जिसे उन्होंने इलेक्ट्रिक मोड़ में तैयार किया था। इसके लिए हर गवाह तक के लिए अलग से इलेक्ट्रिक पेज तैयार किया गया। इससे एक क्लिक पर उससे संबंधित जानकारी उनके स्क्रीन पर उपलब्ध हो जाती थी। उन्होंने इसके लिए पूरे फैसलेे की पीडीएफ फाइल तैयार की थी।
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पूरी तरह से संतुलित है फैसला
शिवानी तुषीर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला पूरी तरह से संतुलित है। राम मंदिर बनाने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद निर्माण के लिए भी पांच एकड़ जमीन अलग से देने का फैसला लिया है। जिससे हर प्रबुद्ध व्यक्ति कह सकता है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला पूरी तरह से संतुलित है।
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