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बारिश से कपास पर मंडराया संकट : महज 1600 एकड़ में सिमटा रकबा, खेतों में जलभराव से बढ़ी चिंता

Mon, 11 Aug 2025 12:22 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत
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फोटो 18: सोनीपत के गांव नकलोई के पास खेत में खड़ी कपास की फसल में भरा पानी। संवाद - फोटो : संवाद
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सोनीपत। कपास उत्पादक किसान इस बार मानसून की मार से खासे परेशान हैं। लगातार हो रही बारिश ने कपास की फसल पर कहर बरपा दिया है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक बारिश से कपास की बढ़वार और उत्पादन दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
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कृषि विभाग ने इस वर्ष जिले में पांच हजार एकड़ में कपास की बिजाई का लक्ष्य रखा था, लेकिन किसानों का रुझान घटने से महज 1600 एकड़ में ही बुआई हो पाई। अब मौसम की मार ने बची-खुची उम्मीदों पर भी पानी फेरने का खतरा पैदा कर दिया है। किसानों का कहना है कि कपास की खेती पहले ही लागत, मौसम और बाजार के उतार-चढ़ाव के कारण जोखिम भरी हो चुकी है, ऐसे में बारिश उनकी कमर तोड़ सकती है।
कृषि अधिकारियों ने किसानों को सलाह दी है कि फसल में जल निकासी की व्यवस्था करें ताकि जड़ों में सड़न और रोगों का प्रकोप रोका जा सके।कपास का रकबा जिले में 10 हजार एकड़ से घटकर महज 1600 एकड़ रह गया है। वर्ष 2023 में पांच हजार एकड़ में कपास उगाई गई थी तो वर्ष 2024 में 2800 एकड़ में कपास उगाई गई।
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वहीं इस खरीफ सीजन में यह आंकड़ा काफी कम रह गया है। गुलाबी सुंडी रोग की आशंका और लगातार नुकसान के चलते किसान पहले ही कपास से दूरी बना रहे थे, अब बारिश ने संकट को और गहरा दिया है।


पानी निकासी बनी चुनौती

शनिवार को हुई भारी बारिश के कारण कई इलाकों में खेत तालाब में बदल गए। कपास उत्पाद किसान विजय दहिया का कहना है कि खेतों में पानी निकालने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है और फसल खराब होने का डर सताता रहता है।



जिले में शनिवार को भारी बारिश हुई है। ऐसे में जहां कपास के खेतों में पानी जमा हो गया है, वहां कपास की फसल पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। किसानों से आह्वान किया गया है कि खेत में पानी निकासी का प्रबंध जरूर करें।
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- डॉ. पवन शर्मा, कृषि उपनिदेशक, सोनीपत
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