वक्फ बोर्ड के फरमान ने आधे शहर की नींद उड़ा दी है। खासकर पुराने शहर में जहां की 50 प्रतिशत से ज्यादा जमीन की मलकियत आज भी वक्फ बोर्ड के नाम है। कांग्रेस राज में बने नए नियम के तहत वक्फ बोर्ड ने अपने किराएदारों को नोटिस भेजकर कहा कि बोर्ड अब तीन साल के लिए 15 प्रतिशत किराए की बढ़ोतरी पर अपनी जमीन दे रहा है।
इसके बाद बोर्ड खुली बोली लगाकर अपनी जमीन देगा। जो अधिक बोली लगाएगा, उसी को जमीन दी जाएगी। बोर्ड के इस फरमान से शहर के बड़े-बड़े स्कूल-कॉलेज संचालकों, व्यापारियों, दुकानदारों व सैकड़ों मकान मालिकों की नींद उड़ गई है। नए नियम के विरोध में रविवार को वक्फ टेनेंट्स एसोसिएशन ने आपात मीटिंग बुलाई और शहर में जुलूस निकालकर भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष राजीव जैन को केबिनेट मंत्री कविता जैन के नाम ज्ञापन दिया।
जानकारों की मानें तो सोनीपत जो हिस्सा वक्फ बोर्ड के पास है, उसमें गढ़ी घसीटा, देवनगर, श्याम नगर, पटेल नगर, कल्याण नगर, ऋषि नगर, बतरा कॉलोनी, रेलवे रोड, गीता भवन रोड, कच्चे क्वार्टर, ओल्ड डीसी रोड, चार मरला, कोट मोहल्ला, फैज बाजार, जमालपुरा, बड़ा बाजार, जटवाड़ा में सैकड़ों गज जमीन है। इतना ही नहीं, खरखौदा, गन्नौर, गोहाना, बरोदा और राई इलाके में भी वक्फ बोर्ड की काफी जमीन है, जिसे किराए पर दिया हुआ है।
लीज पर ली गई जमीन रिन्यू नहीं होगी
गीता भवन में रविवार को सोनीपत टेनेंट्स एसोसिएशन की मीटिंग हुई, जिसमें जिला प्रधान आशीष आर्य ने बताया कि वक्फ बोर्ड के नये कानून की सबसे बड़ी दिक्कत ये ही है कि लीज पर ली गई जमीन रिन्यू नहीं होगी। पहले के कानून के तहत जो जमीन लीज पर ली जाती थी, वह तीन साल बाद 15 प्रतिशत किराया बढ़ाकर रिन्यू हो जाती थी।
दूसरी सबसे बड़ी समस्या यह है कि जमीन के कलेक्टर रेट के हिसाब से लीज की राशि का बेस प्राइज तय किया जाएगा। इसके बाद बोली लाकर जमीन लीज पर दी जाएगी। रेजिडेंशियल में कलेक्टर रेट का 2 प्रतिशत तो कामर्शियल में 2.5 प्रतिशत बेस प्राइज होगा। खास बात यह है कि नए कानून में यह जिक्र नहीं किया गया कि लीज पर ली गई जमीन पर जो भवन, मकान या दुकान बनाए गए हैं, उनका क्या किया जाएगा।
नोटिस मिला तो जागे, तीन साल का समय
वक्फ बोर्ड का यह कानून, वर्ष 1995 के कानून का संशोधन भर है, जो 2014 में ही लागू कर दिया गया था। कानून लागू करने से पहले वक्फ बोर्ड सिर्फ सलाह दे सकता था, लेकिन कानून आने के बाद यह निर्देश देने वाली संस्था बन गई है। नए कानून के बाद वक्फ बोर्ड ने एक साल तक जमीन का सर्वे किया और उसके बाद लोगों को नोटिस देने शुरू कर दिए। अब नोटिस मिले तो लोग सचेत हुए हैं। नोटिस में तीन साल का समय दिया गया। फिलहाल लीज को रिन्यू करने की बात कही गई है।
कांग्रेस राज में बने काले कानून को बदलना होगा
मीटिंग के दौरान वक्फ बोर्ड कानून 2014 के बारे में विस्तारपूर्वक बताया। मंच संचालन पवन तनेजा ने किया। जनसभा के दौरान मंच पर भाजपा नेता राजीव जैन भी पहुंच गए थे। राजीव जैन ने इस कानून को काला कानून बताते हुए प्रदेश सरकार तक आवाज पहुंचाने का आश्वासन दिया। एसोसिएशन की ओर से राजीव जैन को मंत्री कविता जैन के नाम पर ज्ञापन दिया गया। जैन ने कहा कि कांग्रेस राज में बने इस काले कानून को बदलना होगा। इस मुद्दे पर वे शहर के लोगों के साथ हैं।
निकाला जुलूस, मंत्री व सांसद के नाम दिया ज्ञापन
मीटिंग के बाद एसोसिएशन ने शहर में जुलूस निकाला। गीता भवन चौक से एसोसिएशन के पदाधिकारी एवं सदस्य पैदल ही जुलूस की शक्ल में बस स्टैंड और गांधी चौक से होते हुए सेक्टर-14 स्थित सांसद रमेश कौशिक के निवास स्थान पर पहुंचे। लोगों ने सांसद के नाम उनके पीए को ज्ञापन दिया। इस मौके पर जिला उप प्रधान संजीव सरोहा, विकास बंसल, प्रेम नारंग, बलबीर रोहिल्ला, सुरेंद्र मुटरेजा, मुकेश सदाना, धर्मपाल शर्मा, सुरेश भगत, अनिल कपूर, सतीश कुमार, मदन लाल, हरिओम, वीरेंद्र मलिक, जय भाटिया, जय पाल, गुलशन, ओम प्रकाश, अशोक कुमार आदि मौजूद रहे।
आरटीआई का भी जवाब स्पष्ट नहीं
टेनेंट्स की सभा के दौरान कई चीजें सामने आई। चर्चा चली कि एक स्कूल तो वक्फ बोर्ड की जमीन पर बना हुआ है। कुछ लोगों ने तो वक्फ बोर्ड की जमीन की रजिस्ट्री ही अपने नाम करवा ली है। कुछ लोगों ने बताया कि कई साल पहले समुदाय विशेष के एक अधिकारी के आने पर बेनामी जमीन को रजिस्ट्री करके वक्फ बोर्ड के नाम किया गया था।
अब तीन साल के दौरान गहराई से अगर शासन-प्रशासन बोर्ड से जुड़ी जमीन के रिकार्ड को खंगालेगा तो कई खुलासे होने की संभावना है। वक्फ टेनेंट्स एसोसिएशन के प्रधान आशीष आर्य ने बताया कि केंद्र के रिटायर्ड अधिकारी मंगल सेन ने वक्फ बोर्ड में आरटीआई लगाई थी। आरटीआई में नए कानून के संदर्भ में जानकारी मांगी गई थी। इस आरटीआई का भी बोर्ड ने उचित जवाब नहीं दिया। हालांकि, अब इस मामले में मंगल सेन ने उच्चाधिकारियों के पास अपील की है।