सोनीपत। निजी चिकित्सक अब एचआईवी मरीजों की पहचान कर सकेंगे। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से 22 दिसंबर को निजी चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के उप सिविल सर्जन ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन को प्रशिक्षण के लिए पत्र लिखा है।
एचआईवी एक राष्ट्रीय स्तर पर सूचित करने योग्य बीमारी है। डॉक्टरों को स्वास्थ्य विभाग को मामलों की सूचना देनी होती है ताकि निगरानी और बेहतर प्रतिक्रिया सुनिश्चित की जा सके। यह प्रक्रिया गोपनीय होती है और रोगी की देखभाल के लिए जानकारी साझा की जाती है। निजी क्लीनिक भी सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करते हैं और मरीजों को उचित परामर्श व उपचार के लिए आगे रेफर करते हैं।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से हर साल 75 हजार लोगों की सैंपलिंग की जाती है। चालू वित्त वर्ष में 73056 लोगों की सैंपलिंग की जा चुकी है। इनमें से 150 नए एड्स पीड़ित मिले हैं। किसी मरीज को एचआईवी की पुष्टि होते ही सबसे पहले उन्हें टीबी की स्क्रीनिंग के लिए भेजा जाता है।
आईसीटीसी में मरीजों को टीबी के लिए कैट वन का कोर्स कराया जाता है। इसके बाद जब मरीजों में सुधार आना शुरू हो जाता है तो उसके बाद उसे एआरटी सेंटर भेजा जाता है। जहां मरीजों की सीडी फाॅर और वायरल लोड की जांच की जाती है। यदि मरीज का सीडी फाॅर 350 से 250 के बीच मिलता है तो पीड़ित मरीज को एआरटी की दवाई शुरू कर दी जाती है।
निजी चिकित्सक भी एचआईवी मरीजों की पहचान कर सकेंगे। इसके लिए विभाग की तरफ से निजी चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। निजी चिकित्सकों व आईएमए को भी 22 दिसंबर को प्रशिक्षण लेने के लिए पत्र लिख दिया गया है।
डॉ. तरुण यादव, उप सिविल सर्जन