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टीवी सीरियल से निकल कर चिरस्मी पहुंची सास-बहू की लड़ाई

Thu, 21 Jan 2016 11:44 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
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बेहद चर्चित रहे सीरियल ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’, की लड़ाई अब चिरस्मी पहुंच गई है। एक तरफ परिवार की पुरानी चौधर को कायम रखने के लिए निवर्तमान सरपंच रामकुंआर ने जहां अपने बेटे की बहू मुकेश देवी को मैदान में उतार रखा है वहीं उनके चचेरे भाई रोहताश की पत्नी कृष्णा देवी उन्हें चुनौती दे रही हैं। ऐसे में गांव की चौधर के लिए परिवार में ही घमासान मचा है। हालांकि सास-बहू की इस लड़ाई में चार प्रत्याशी राजबाला, सरोजबाला, ऊषा और पिंकी भी मैदान में हैं, और ये सभी भी पूरा जोर लगाए हैं। अब तो 24 जनवरी की शाम को ही पता लगेगा कि ऊंट किस करवट बैठता है।
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निवर्तमान सरपंच रामकुंआर ने बताया कि उसके पिता जिले सिंह 1970 से 1994 तक गांव के सरपंच रहे। भाई हुकम सिंह ने पूरा साथ दिया। उनके बाद 2010 में खुद रामकुंआर ने चुनाव लड़ा और पांच साल चौधर अपने साथ रखी। अबकी बार चिरस्मी में सरपंच का पद सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित हो गया। रामकुंआर की पत्नी का स्वर्गवास हो चुका है। ऐसे में प्रॉपर्टी का काम करने वाले बेटे दिनेश की पत्नी मुकेश का सरपंच पद के लिए नामांकन कराया। मुकेश 12वीं पास है।

बदलाव के लिए मांग रही वोट
जिले सिंह के भाई हुकम सिंह का बेटे रोहताश की पत्नी कृष्णा देवी भी चुनाव मैदान में हैं। कृष्णा देवी का कहना है कि चुनाव लड़ने का अधिकार सभी को है, वे भी इस जिम्मेदारी को बखूबी निभा सकती हैं। गांव में पानी की निकासी का स्थाई बंदोबस्त करवाना, साफ-सफाई की व्यवस्था सुदृढ़ करना, ग्रामीणों की जरूरी मांगों को प्रशासन के समक्ष रख उनको पूरा कराना और इसके साथ-साथ बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की मुहिम को आगे ले जाने के लिए प्रयास करेंगी।
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यहां जाति से ऊपर उठकर देते हैं ग्रामीण वोट
ग्रामीणों ने बताया कि चिरस्मी की जनसंख्या 5 हजार के करीब है, जिसमें सामान्य वर्ग और एससी-बीसी वर्ग के लोगों की संख्या बराबर ही है। गांव में 1926 मतदाता हैं, जो 24 जनवरी रविवार को अपने लिए नई पंचायत का चयन करेंगे।
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