सेक्टर 14-15 आउटर रोड की खस्ता हालात को सुधारने के लिए काम शुरू हो चुका है। प्रारंभिक चरण में ही सही, लेकिन काम तो शुरू हुआ। हरियाणा अर्बन डेवलेपमेंट अथॉरिटी (हुडा) के अधिकारियों की मानें तो इस सड़क को अब शक्तिशाली बनाया जाएगा। पहले जहां यह सड़क 10 टन की क्षमता वाली थी, वहीं अब इसकी क्षमता 30 टन होगी।
हालांकि कमी उसके बाद भी रह जाएगी, लेकिन फिर भी सड़क की वह दुर्दशा नहीं होगी, जो फिलहाल है। मौजूदा हालात तो देखें तो यहां सड़क के नाम पर सैकड़ों गड्ढे हैं। यह ही नहीं सड़क की उखड़ी बजरी के कारण यहां से गुजरने वाले दोपहिया वाहन चालकों की शामत आई रहती है।
आयेदिन कोई न कोई हादसा इसी वजह से होता है। बहरहाल सड़क के लिए हुडा की ओर से सर्वे किया गया। मुरथल स्थित दीनबंधू छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सहयोग से मंगलवार को सर्वे शुरू हुआ था जो बुधवार सुबह तक चला।
9 से 9 बजे तक का सर्वे, डिजाइन भी करेंगे तैयार
मुरथल यूनिवर्सिटी के सहयोग से हुडा ने सर्वे किया है। मंगलवार सुबह 9 बजे से बुधवार सुबह 9 बजे तक सर्वे किया गया। सर्वे में यूनिवर्सिटी से एमटेक कर रहे प्रथम वर्ष के छात्र अंकित सांगवान, आशीष त्यागी, गौरव शर्मा शामिल हैं। तीनों ही सिविल इंजीनियरिंग में हाईवे डिपार्टमेंट से हैं। वाहनों के एक्सल को बेस मानकर सर्वे किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि सर्वे के बाद मुरथल यूनिवर्सिटी के छात्रों द्वारा ही सड़क का डिजाइन भी तैयार किया जाएगा।
4 इंच, 50 एमएमऔर 40 एमएम
अधिकारियों की मानें तो अबकी बार सड़क को खास तरीके से बनाया जाएगा। अभी तक तय डिजाइन के अनुसार सबसे पहले मौजूदा सड़क को स्क्रैप कर रिले करेंगे। इसके बाद एक 4 इंच की लेयर छोटे पत्थरों की डाली जाएगी। इसके ऊपर 50 एमएम की परत बिटूमिनिस मकेडम डाली जाएगी। सबसे ऊपर 40 एमएम की परत बिटूमिनिस कंकरीट की होगी। इस तरह से सड़क की क्षमता 30 टन तक पहुंच जाएगी।
फिर भी रह जाएगी कमी, क्योंकि 50 की है जरूरत
अंदर खाते की बात करें तो पता चलता है कि 30 टन क्षमता वाली सड़क भी यहां पूरी तरह से कामयाब नहीं है। पहले हुए सर्वे से पता चलता है कि इस सड़क पर 50 टन वजन के वाहन भी आते-जाते हैं। ऐसी स्थिति में 30 टन क्षमता वाली सड़क भी पूरी तरह से कामयाब नहीं होगी। हालांकि फर्क इतना पड़ेगा कि 10 टन क्षमता वाली जो सड़क 4-5 महीने में टूटनी शुरू हो गई थी वहीं 30 टन क्षमता वाली सड़क बिना टूटे लगभग डेढ़ से दो साल निकाल ही देगी।
भारी वाहनों के प्रयोग से टूट रही सड़क
बता दें कि महाराजा अग्रसेन चौक से महाराणा प्रताप चौक तक जाने वाली इस सड़क के उखड़ने का प्रमुख कारण अनाधिकृत वाहन हैं। सर्वे में स्पष्ट हुआ है कि भारी वाहन इस सड़क को बतौर बाईपास इस्तेमाल करते हुए रोहतक की ओर निकल जाते हैं। जबकि यह सड़क केवल रिहायशी इलाके में इस्तेमाल होने वाले वाहनों के लिए बनी है। भारी वाहनों के लगातार आवागमन से ही सड़क की स्थिति इतनी दयनीय हो गई है।
होते रहते हैं हादसे
इस सड़क पर कई बार हादसे हो चुके हैं। अगस्त महीने की शुरुआत में ही महाराजा अग्रसेन चौक के पास एक स्कूटी सवार शिक्षिका की मौत हो गई थी। बताया गया था कि सड़क पर गड्ढे के चलते स्कूटी अनियंत्रित हो गई, जिसकी वजह से शिक्षिका सड़क पर गिरी और पीछे से आ रही एक स्कूल बस की चपेट में आ गई। चौक के पास ही लगभग दो महीने पहले सड़क हादसे में एक अन्य स्कूटी सवार युवती की मौत हो गई थी। इसके अलावा प्रतिदिन कोई न कोई दोपहिया वाहन चालक असंतुलित होकर गिरता है और चोटिल हो जाता है।
क्या कहता है सर्वे
* पीक ऑवर तीन जोन में बांटा गया है। 8 से 9, 11 से 12 और शाम 5 से 6.30 बजे तक।
* गाड़ियों की अपेक्षा भारी वाहनों की आवाजाही अधिक रहती है।
* यहां से गुजरने वाले मल्टीपल व्हीकल (तीन एक्सेल से ज्यादा) दिन में तकरीबन 100 के करीब हैं।
* यहां से गुजरने वाला हर पांचवां वाहन लोडेड ट्रैक्टर-ट्राली, ट्रक और टाटा 407 में से एक होता है।
सड़क पूरी तरह से खस्ताहाल हो चुकी है। गैरकानूनी रूप से भारी वाहन इस सड़क से आते-जाते हैं। इनके लिए यह सड़क नहीं बनी थी। अब 10 टन क्षमता वाली इस सड़क को 30 टन तक की क्षमता का बनाया जाएगा। सर्वे के लिए आज से ही यूनिवर्सिटी के छात्र बैठे हैं। सितंबर के अंत तक सड़क पर काम शुरू हो जाएगा।
-दीपक गोयल, एक्सईएन, हुडा, सोनीपत।