सोनीपत। नागरिक अस्पताल में चार दिन बाद लगी ओपीडी में मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी। ओपीडी में चर्म रोगों के सबसे ज्यादा मरीज पहुंचे। बारिश के बाद अचानक चर्म रोगियों और बुखार पीड़ितों की संख्या में इजाफा हो गया है। वहीं संक्रामक रोगों के मरीज भी अस्पताल में उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। वीरवार को ओपीडी करीब 1700 रही थी, लेकिन चार दिन के अवकाश के बाद मंगलवार को लगी ओपीडी में मरीजों की संख्या 2000 के पार पहुंच गई। चार दिन की छुट्टी के बाद पांचवें दिन भी कान, नाक व गला (ईएनटी) विशेषज्ञ की ओपीडी बंद रही। ईएनटी विशेषज्ञ की कोर्ट में गवाही के चलते वह अस्पताल में ओपीडी नहीं लगा सके। जिससे मरीजों को परेशानी हुई। वहीं कई मरीज दवा न मिलने के कारण भी परेशान रहे।
अमर उजाला की टीम मंगलवार सुबह 10 बजे नागरिक अस्पताल पहुंची। ओपीडी पर्ची बनवाने के लिए काउंटर पर मरीजों की लंबी लाइन लगी थी। ओपीडी में चिकित्सक कक्षों के बाहर मरीजों की भीड़ लगी थी। कोई कुर्सियों पर बैठा था तो कोई फर्श पर ही बैठकर अपने नंबर का इंतजार कर रहा था। ज्यादातर मरीजों का कहना था कि वह बुखार से पीड़ित हैं और गले में खराश, सिरदर्द, शरीर दर्द, जुकाम व सर्दी से जूझ रहे हैं। बारिश के बाद बुखार के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। दोपहर में गर्म हवा और रात में हल्की ठंड होने से लोग ज्यादा बीमार हो रहे हैं। जांच में डेंगू के मरीज भी मिल रहे हैं। अब तक डेंगू के 28 मरीज मिल चुके हैं। साथ ही बच्चे भी वायरल की चपेट में आ रहे हैं। इस मौसम में बच्चों और बुजुर्गों को खास एहतियात बरतने की जरूरत है। वहीं अस्पताल में सबसे अधिक मरीज चर्म रोग से पीड़ित होकर पहुंच रहे हैं। दोपहर दो बजे तक चर्म रोग का इलाज कराने के लिए 309 मरीज पहुंचे। 11 बजे जब टीम ईएनटी विशेषज्ञ के कमरे के बाहर पहुंची तो दरवाजा बंद मिला। दरवाजे पर ही बड़ी पर्ची पर लिखा था कि आज डॉक्टर कोर्ट में हैं। जानकारी मिली कि डॉ. प्रदीप लाकड़ा की ओपीडी थी। उन्हें कोर्ट में गवाही को जाना पड़ा। जिसके चलते उनकी ओपीडी नहीं लग सकी। ईएनटी की ओपीडी सुबह से ही बंद रही। ऐसे में अधिकतर मरीजों को लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा। उसके बाद टीम 12 बजे फिजिशयन डॉ. शैलेंद्र राणा की ओपीडी में पहुंची। वहां पर मरीजों की लाइन लगी थी। डॉ. शैलेंद्र राणा ने बताया कि बारिश में खुजली, सर्दी, खांसी, उल्टी, वायरल बुखार, दस्त, मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड, पीलिया आदि के रोग फैलने लगते हैं। बारिश के पानी, धूप और गंदगी से बचने की जरूरत है। इस मौसम में विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। बच्चे जल्द बीमारी की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे में बीमारी की चपेट में आते ही चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है।
चर्म रोग विशेषज्ञ के पास उपचार कराने आया था। विशेषज्ञ ने ओपीडी पर्ची पर चर्म रोग निवारण की दवा लिख दी। डिस्पेंसरी में पूरी दवा न मिलने से परेशानी हो रही है। बाजार से महंगे दामों पर दवा खरीदना पड़ेगा।- नरेश, शिव कॉलोनी
खेतों में काम करते समय चर्म रोग की समस्या बढ़ जाती है। हाथों में एलर्जी होने से अस्पताल में आया तो यहां पर काफी भीड़ मिली। काफी देर बाद नंबर आया। चिकित्सक ने ओपीडी पर्ची पर दवा लिखी, लेकिन दवा न मिलने के कारण दिक्कत हो रही है। - बिजेंद्र सिंह, जैनपुर
सरकार की ओर से अस्पताल में दवाइयां मुफ्त देने का वादा किया जाता है। यहां दवाओं का टोटा होने से मरीजों को लौटना पड़ रहा है। सरकार की ओर से जल्द ही दवाओं की पूर्ति की जानी चाहिए, जिससे परेशानी का सामना न करना पड़े।- कमला निवासी कबीरपुर
अस्पताल में 18 दिन पहले ही मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराया था। अस्पताल में दवा लेने के लिए आई तो आंखों की दवाई नहीं मिली। ऐसे में बाजार से दवा खरीदनी पड़ेगी। इससे आर्थिक बोझ पड़ेगा।- छोटी निवासी थरिया
चार दिन की छुट्टी के बाद मंगलवार को ओपीडी 2000 के पार पहुंच गई। सबसे ज्यादा मरीज बुखार व चर्म रोग के आ रहे हैं। रोहतक स्थित वेयर हाउस में दवाएं न होने के कारण अस्पताल में नहीं आ रही। मुख्यालय के आदेश के बाद स्थानीय स्तर पर दवाओं की खरीद की जा सकती है। दवाएं मंगाने के लिए मुख्यालय को पत्र लिखा गया है।-डॉ. राजेश सिंघल, रेजीडेंट चिकित्सा अधिकारी, नागरिक अस्पताल