फोटो 04- सोनीपत के मुरथल स्थित दीनबंधु छोटू राम विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में आयोजि
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सोनीपत। बचकर रहना चमचों से ओ अफसर कुर्सी पर बैठे, कर देंगे ये ढोल बजाई जो तुम्हारे दिल में बैठे कविता प्रोफेसर डॉ.ज्योतिराज ने चमचों पर सुनाई। साथ ही उन्होंने ग्रामीण जीवन की याद दिलाते हुए एक अन्य कविता हाय वो गंडासा याद आवै, हाय तरक्की ना भावै सुनाई। वह मुरथल स्थित दीनबंधु छोटू राम विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में प्रो. डॉ.ज्योतिराज के आवास पर काव्य सम्मेलन में पहुंचे थे।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद सोनीपत इकाई ने मासिक बैठक का आयोजन किया गया। इसमें आयोजित काव्य सम्मेलन में साहित्यकारों ने शिरकत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता डाॅ. पूर्णमल गौड़ ने की। बैठक में प्रदेश साहित्य परिषद के उपाध्यक्ष रामधन शर्मा ने भजन सुनाया और साहित्य परिषद के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने अपनी हिमालय की त्रासदी पर कविता सुनाई, हे धीर वीर गंभीर हिमालय कैसी करवट बदली। लाशों पर लाशें बिछ गई कुछ पिछली कुछ अगली। क्या अकाल पुरुष ने अपना नेत्र तीसरा खोला। कैसा तांडव नाच किया जो सारा पर्वत डोला। सीमा माहेश्वरी ने श्रीराम भक्ति पर एक सुंदर भजन गाकर सुनाया और नारी महत्व पर अपनी कविता सुनाई। जिसमें हमें नारी ने जन्मा है, हमें नारी ने पाला है, यह उसकी ही तो महिमा है कि हर घर में उजाला है। सुखदा नागपाल ने रचना प्रस्तुत की जिसके अंश इस प्रकार हैं कि किसने दीप जलाए दीप जलाकर किया उजाला अपना आप छुपाया किसने दीप जलाए। बैठक में ओडिशा के भुवनेश्वर में हुए राष्ट्रीय अधिवेशन के बारे में भी चर्चा की। कार्यक्रम के बाद डॉ. पूर्णमल गौड़ ने कविता वाचन किया। बैठक में कार्यकारी अध्यक्ष नरेश आकाश, सत्येंद्र दहिया व डॉ. राजवीर सिंह मौजूद रहे।