नोट की मार अब उन मरीजों पर भारी पड़ने लगी है, जिनके आपरेशन निजी अस्पतालों में होने थे। अमर उजाला की टीम ने शुक्रवार को शहर के निजी अस्पतालों के हालात जाने तो सामने आया कि कुछ अस्पतालों ने ऑपरेशन को टाल दिया है तो वहीं कुछ चेक या फिर पेटीएम के सहारे पेमेंट ले रहे हैं। वहीं, एक अस्पताल ने बताया कि मरीज द्वारा दिया गया चेक बाउंस होने के बाद से उन्होंने चेक लेने बंद कर दिए हैं। अस्पतालों में नोटिस लगा दिए हैं कि पेमेंट केवल छोटे नोट में ही करें। शहर के मुख्य 10 अस्पतालों में 50 ऑपरेशन पिछले एक सप्ताह में टाल दिए गए हैं।
हां टाले हैं 10 ऑपरेशन : डॉ. दुआ
दुआ अस्पताल के डॉ. केके दुआ का कहना है कि वे गंभीर हालत में आने वाले मरीजों का तो इलाज कर रहे हैं। चाहे उनके पास देने के लिए छोटे नोट क्यों न हो, लेकिन पुराने नोट बंद होने के कारण उन्हें 10 आपरेशन टालने पड़े हैं। चेक बाउंस होने का खतरा है, इसलिए चेक से पेमेंट नहीं ले सकते।
कार्ड से ले रहे हैं पेमेंट: बंसल
बंसल नर्सिंग होम के डॉ. हरित बंसल ने बताया कि वे कार्ड स्वैप के जरिए पेमेंट ले रहे हैं। चेक से भी पेमेंट ली जा रही है लेकिन एक चेक बाउंस हो चुका है। डॉ. बंसल के अनुसार, पुराने मरीजों का इलाज उधार में भी कर रहे हैं।
बड़े नोट नहीं, चेक ले रहे हैं: शर्मा
शर्मा अस्पताल के सर्जन डॉ. जीडी शर्मा ने बताया वे चेक से पेमेंट ले रहे हैं। कोई मजबूर दिखाई देता है तो वे उधार भी कर रहे हैं। कार्ड या बड़े नोट उनके यहां नहीं लिए जा रहे हैं। ऑपरेशन टालने की बात पर डॉ. जीडी शर्मा का कहना है कि मरीज कहीं न कहीं से जुगाड़ कर ही लेता है, उन्हें समय दिया जा रहा है।
अगर किसी भी मरीज का निजी अस्पताल में ऑपरेशन टाला जाता है तो वे सरकारी अस्पताल में आकर अपना इलाज करवाएं। जिनका यहां आपरेशन हो सकता है, उनका किया जाएगा। अगर कोई सुविधा यहां पर नहीं है तो उस स्थिति में ऑपरेशन के लिए पीजीआई में रेफर कर दिया जाएगा।