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एनजीटी के आदेशों की उड़ी धज्जियां, यमुना में मशीनों से रेत खनन

Thu, 18 May 2017 12:36 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला सोनीपत
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यमुना में मशीनों से खनन करके बनाए गए गहरे कुंड - फोटो : amarujala beuro
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सरकार भले ही नदियों को बचाने का दावा करती है और उसके लिए करोड़ों रुपये का बजट भी जारी किया जाता है, लेकिन सच्चाई यह है कि मशीनों से रेत खनन करके यमुना का सीना चीरा जा रहा है। बड़ौली के पास यमुना में मशीनों से खनन करके पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया गया है और गहरे कुंड बना दिए गए हैं। इस तरह सुप्रीम कोर्ट व एनजीटी के मशीनों से खनन नहीं करने के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। खनन विभाग के नियमों की भी खूब अनदेखी हो रही है और यमुना की बाढ़ को रोकने के लिए बनाई गई ठोकरों के पास ही मशीनों से खनन किया जा रहा है। इससे बाढ़ आने पर बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। इतना कुछ होने के बाद भी प्रशासनिक अधिकारी व खनन विभाग पूरी तरह से आंख बंद किए हुए हैं और उन्हें यमुना में मशीनों से खनन होता नहीं दिख रहा है।
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नहीं किया जा सकता मशीनों से खनन
नदियों में होने वाले रेत खनन से बिगड़ते पर्यावरण संतुलन को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट व एनजीटी के सख्त आदेश हैं कि किसी भी जगह मशीनों से खनन नहीं किया जाएगा, लेकिन बड़ौली में दिन-रात खुलेआम इन आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। वहां पॉकलेन व जेसीबी से रेत खनन करके यमुना का सीना चीरा जा रहा है।
आधा दर्जन मशीनों से चल रहा खनन
यहां ग्रीवेंस कमेटी की मीटिंग में आने पर खनन मंत्री नायब सैनी से लेकर खनन विभाग के अधिकारी अभी तक दावा करते थे कि यमुना में मशीनों से खनन नहीं किया जा रहा है, लेकिन मंत्री से लेकर खनन विभाग के अधिकारियों की पोल बुधवार सुबह खुल गई, जब यमुना में बड़ौली के पास आधा दर्जन मशीनों से रेत खनन किया जा रहा था।
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ग्रामीण बोले, महीनों से चल रहा है ये सब
बड़ौली के लोगों ने बताया कि वहां मशीनों से खनन अभी से नहीं किया जा रहा है, बल्कि पिछले कई महीने से लगातार मशीनों को यमुना में उतारकर खनन किया जाता है, जिसमें नियम व कानून सभी को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है। यमुना में जिस जगह पर मशीनों से खनन किया जा रहा है, उस रास्ते पर पहले ही दबंगों को बैठा दिया जाता है और यमुना के पास किसी को नहीं जाने दिया जाता है। वहां केवल वह ट्रक चालक जा सकते हैं, जिनको रेत भरवाना होगा।
एक किमी तक बना दिए यमुना में कुंड
यमुना में पानी आने पर ग्रामीण नहाने के लिए जाते हैं, जिससे उनकी डूबकर मौत हो जाती है। बड़ौली के पास पिछले साल भी लगभग छह युवकों की डूबकर मौत हो गई थी। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि यमुना में खनन करके 10-15 फुट तक गहरे कुंड बना दिए जाते हैं। जब यमुना में पानी आता है तो वह कुंड दिखाई नहीं देते हैं और वहां नहाने जाने वाले उस कुंड में डूब जाते हैं, जिससे उसकी मौत हो जाती है। इसको लेकर पिछले साल काफी हंगामा भी हुआ था, लेकिन उसके बावजूद मशीनों से खनन किया जा रहा है।
रेत से गिरता है पानी, टूट गई सड़कें
जिले में अगर किसी सड़क की सबसे बुरी हालत है तो वह बहालगढ़ से खेवड़ा होते हुए यूपी बॉर्डर तक जाने वाली सड़क की है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि यमुना में मशीनों के सहारे काफी नीचे से रेत निकाली जा रही है, जिससे उस रेत में पानी होता है और उसे ट्रकों में भर दिया जाता है। जब वह ट्रक सड़क पर आता है तो चालक उन ट्रकों को जगह-जगह खड़े कर देते हैं, जिससे ट्रकों से पानी सड़क पर गिरता है और उससे सड़क टूटनी शुरू हो जाती हैं। इस तरह सरकार को बड़ा नुकसान भी पहुंचाया जा रहा है तो आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
यह है रेत खनन करने के नियम
जिला खनन अधिकारी जगदीश ने जब खनन करने के नियमों के बारे में बताया तो उससे साफ हो गया कि बड़ौली में किस तरह से नियम व कानूनों को ताक पर रखकर खनन का खेल किया जा रहा है। जिला खनन अधिकारी के अनुसार किसी भी जगह जेसीबी या पॉकलेन मशीन से खनन नहीं किया जा सकता है और यह पूरी तरह अवैध है। इसके अलावा नदी में 3 मीटर गहराई तक खनन किया जा सकता है। यह खनन भी नदी में ठोकर से 15 फुट अंदर करना होता है, जिससे नदी में ज्यादा पानी आने से ठोकर कमजोर होने पर कोई नुकसान नहीं हो, लेकिन बड़ौली में ठोकर के पास ही खनन किया जा रहा है और ठोकर पर ही बिना अनुमति के रास्ता बनाकर रेत से भरे ट्रकों को दौड़ाया जा रहा है।

वहां कई बार मशीनों से खनन होने की सूचना मिली थी, जिसके आधार पर छापा मारा गया था लेकिन वहां मशीन चलती हुई नहीं मिली थी। यह हो सकता है कि रात के समय मशीनें चलाई जाती हों। उसकी जांच कराई जाएगी और ऐसा होता है तो कार्रवाई की जाएगी।
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-जगदीश, जिला खनन अधिकारी
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