किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार दंगा विरोधी दस्ता शुक्रवार को अपनी पहली ही परीक्षा में फेल हो गया। हालत यह रही कि आईजी श्रीकांत जाधव और एसपी अभिषेक गर्ग के सामने न तो पुलिस की वाटर कैनन चली और न ही पुलिसकर्मी पथराव से बचने के लिए सुरक्षा दीवार बना पाए। पुलिस की लापरवाही से कुपित आईजी ने चेतावनी देते हुए कहा कि भीड़ के सामने पथराव के समय संभलने का मौका नहीं मिलेगा। ऐसे में हर रोज अभ्यास के बाद आपस में तालमेल बन पाएगा।
प्रदेश में जिलास्तर पर दंगा विरोधी दस्ते गठित किए गए हैं। इसी के चलते आईजी और एसपी दोपहर पुलिस लाइन में पहुंचे और अल्फा, ब्रेवो, चार्ली और डेल्टा कंपनियों की परीक्षा ली। दस्तों में शामिल पुलिसकर्मियों ने दंगे के दौरान पथराव के समय बचाव की प्रक्रिया दोहराई। पुलिस विभाग में ड्राइवरों को हिदायत दी गई कि वे एक तरफ से पथराव करेंगे, दूसरी तरफ दंगा विरोधी दस्ता बचाव उपकरणों की सुरक्षा दीवार बनाकर अपना बचाव करेगा। दस्ते ने सुरक्षा दीवार बनाने की कई बार कोशिश की, लेकिन हर बार कहीं न कहीं छेद रह जाता था। इस पर कंपनी कंमाडर आकर छेद बंद करने की हिदायत देता। यह प्रक्रिया तीन बार दोहराई गई।
आंसू गैस के गोले, बने नागरिकों के लिए आफत
इसी बीच दूसरे दस्ते ने आंसू गैस के गोले फेंके, लेकिन जैसे ही पुलिस लाइन के दूसरे कोने पर जहां आंसू गैस के गोले छोड़े, वहां पर तीन नागरिक पहले से बैठे थे। जब तक वे उठ पाते, जब तक गोले नजदीक गिर गए। तीनों ने भागकर अपनी जान बचाई।
एक धमाका बम निकला फुस्स
आईजी के सामने दस्ते ने तीन धमका बम छोड़े। पहला बम फटने से जोरदार धमाका हुआ, लेकिन दूसरा फुस्स निकला। तीसरे बम से फिर से धमाका हुआ।
जवान को दूसरी तरफ देखना पड़ महंगा
कंपनियों की परीक्षा के बाद आईजी ने जवानों को संबोधित किया। सवाल-जवाब के बीच आईजी ने कहा कि आत्मरक्षा करते हुए जवानों का मुख्य उद्देश्य कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखना है। इस दौरान एक-दूसरे को दोस्त बना लें। जब आईजी बोल रहे थे, तभी एक जवान दूसरी तरफ देख रहा था। आईजी की उस पर नजर पड़ गई। उसे आगे बुलाकर ढाई मिनट तक ऊपर हाथ करके खड़े रहने की सजा दी। इस मौके पर एसपी के अलावा उप पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार, राहुल देव, सुनील कुमार व सतीश कुमार भी मौजूद रहे।