सोनीपत। शारदीय नवरात्र के पहले दिन सोमवार को कलश स्थापना के साथ मां के शैलपुत्री स्वरूप की पूजा की जाएगी। नवरात्र को लेकर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने रविवार को पूजा सामग्री समेत अन्य वस्तुओं की खरीदारी की। शहर के सभी देवी मंदिर सजाए गए हैं।
पितृ पक्ष के चलते बाजार में खरीदारी कम हो रही थी लेकिन नवरात्र आते ही बाजार गुलजार हो गए हैं। श्रद्धालुओं ने नवरात्र पर्व को लेकर तैयारी पूरी कर ली हैं। रविवार को भी कच्चे क्वार्टर मार्केट सहित अन्य बाजारों में लोग पूजन संबंधी सामग्री की खरीदारी के लिए पहुंचे।
दुकानदार राजेश कुमार, अखिलेश, नितिन ने बताया कि नवरात्र उत्सव को लेकर बाजार सज गए हैं, दुकानों पर माता रानी की चुनरी व अन्य सामान पूरी मात्रा में उपलब्ध है। रविवार को श्रद्धालुओं ने पूजन थाली से लेकर नारियल, धूप-दीप, माता रानी की 16 शृंगार में उपयोग में होने वाली सभी वस्तुओं की खरीदारी की।
नवरात्र उत्सव को लेकर बाजार में दुकानों के अलावा पूजन सामग्री के स्टॉल भी लगाए गए हैं। नवरात्र में अच्छा व्यापार होने की उम्मीद है।
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 22 सितंबर को शारदीय नवरात्र उत्सव का शैलपुत्री की आराधना से प्रारंभ होगा। इस वर्ष श्रद्धालु नवरात्र के 10 दिन मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना कर व्रत धारण करेंगे।
शहर के बड़ा बाजार स्थित सिद्धपीठ चिटाने वाली माता मंदिर, कामी रोड स्थित सिद्धपीठ श्री चंडी मां महाकाली प्राचीन मंदिर, माॅडल टाउन स्थित नवदुर्गा माता मंदिर सहित अन्य मंदिरों में विशेष तैयारी पूरी कर ली गई हैं।
मंदिरों के कपाट प्रात:काल में ही मां के दर्शनों के लिए खोल दिए जाएंगे। मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रहेगी।
सिद्धपीठ श्री चंडी मां महाकाली प्राचीन मंदिर के पुजारी पंडित हनुमान प्रसाद ने बताया कि इस वर्ष नवरात्र में प्रतिदिन विशेष पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान, माता रानी की भव्य आरती व सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाने के साथ सुरक्षा व्यवस्था के विशेष प्रबंध किए गए हैं। दूरदराज से आने वाले भक्तों की सुविधा के लिए जलपान, प्रसाद वितरण, अन्य सेवाएं उपलब्ध रहेंगी।
सिद्धपीठ श्रीदेवी चिटाने वाली माता मंदिर के पुजारी राजेश शौनक ने बताया कि श्रद्धालु वर्षभर में चार बार नवरात्र मनाते हैं, लेकिन शारदीय नवरात्र का विशेष महत्व है। मां दुर्गा ने इन नौ दिनों के युद्ध के पश्चात महिषासुर नाम के राक्षस का संहार किया था। नवरात्र के दसवें दिन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक दशहरा पर्व मनाया जाएगा।
नवरात्र के नौ दिन किस स्वरूप का महत्व
प्रथम शैलपुत्री : धन, रोजगार व स्वास्थ्य के लिए
द्वितीय ब्रह्मचारिणी : जीवन में सफलता के लिए
तृतीया चंद्रघंटा : आत्म कल्याण व शांति के लिए
चतुर्थ कूष्मांडा : सफलता व सुखी जीवन के लिए
पंचम स्कंदमाता : शक्ति संचार के लिए
षष्ठी कात्यायनी : रोगों से मुक्ति पाने के लिए
सप्तमी कालरात्रि : आलौकिक शक्तियों व तंत्र-मंत्र सिद्धि के लिए
अष्टमी महागौरी : पाप से मुक्ति, आत्म सफलता के लिए
नवमी सिद्धिदात्री : जीवन की सभी सफलताओं के लिए