फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हालातों को बोल्ड कर नेशनल टीम तक पहुंची स्पिनर प्रीति

Sat, 29 Nov 2014 12:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
विज्ञापन
विज्ञापन
कौन कहता आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों। दूसरे जिसे असंभव कहते हैं, प्रीति वही ठान लेती है। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की लेफ्ट आर्म्स स्पिनर प्रीति बोस ने साबित किया है कि हौसला और दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो कोई मंजिल दूर नहीं।
विज्ञापन


संसाधन का रोना रोने वाले खिलाड़ियों के लिए नजीर हैं प्रीति। संसाधन पूरे नहीं थे पर हौसला बुलंद। पुरानी बॉल और बैट से कहीं भी प्रैक्टिस करने पहुंच जातीं।

एमडीयू टीम की ओर से नॉर्थ जोन इंटर यूनिवर्सिटी वुमन क्रिकेट चैंपियनशिप खेलने यहां पहुंची प्रीति ने बताया कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम को वर्ल्ड कप जिताना उसका सपना है। जिसके लिए वह लगातार पसीना बहा रही है।
विज्ञापन


प्रीति सोनीपत जिले के संादल कलां गांव निवासी एक छोटेे किसान रकम सिंह की बेटी है। उसके पिता बंटाई पर खेत लेकर खेती करते हैं। क्रिकेट के प्रति प्रीति के जुनून के आगे उनको झुकना पड़ा। पढ़ने में अव्वल प्रीति ने हाईस्कूल में 62 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए।

11वीं में बॉयो विषय ले रखा था। खरखौदा स्कूल में उसकी प्रैक्टिस देख खेल शिक्षक ने स्कूल टीम में खेलने का ऑफर दिया तो वो तैयार हो गई। परिजन चाहते थे कि प्रीति बॉयो पढ़े और डाक्टर बने। शिक्षक ने समझाया तो परिजन भी मान गए और बॉयो छोड़कर कॉमर्स संकाय चुन लिया।


स्कूल से भरी उड़ान आज तक जारी
खरखौदा स्कूल से शुरू हुई प्रीति की उड़ान आज तक जारी है। 2007 में ही अंडर 19 में बीसीसीआई के लिए खेली। 2008 में पटियाला में हरियाणा क्रिकेट एसोसिएशन के लिए खेलते हुए रानी झांसी ट्राफी पर कब्जा दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

2014 में विजयवाड़ा में भारतीय महिला ए टीम से खेलते हुए श्रीलंका के 3 प्रमुख खिलाड़ियों का विकेट ले देश को विजयश्री दिलाई। 22 वर्षीय प्रीति अब खरखौदा गवर्नमेंट कॉलेज में योगा प्रथम वर्ष की छात्रा है। क्रिकेट के लिए उसका जुनून और संघर्ष की दास्तां हर खिलाड़ी के लिए प्रेरणा है।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें