नेशनल हाईवे-44 को दिल्ली से पानीपत तक वाहन चालकों की सुविधा व लोगों के बेहतर सफर के लिए आठ लेन करने का काम शुरू जरूर हुआ। लेकिन अब यह नेशनल हाईवे इतना खतरनाक हो गया है कि इस पर जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है।
नेशनल हाईवे को दिल्ली के सिंघु बॉर्डर से पानीपत के सिवाह गांव तक खोदकर छोड़ दिया गया है और दिल्ली से पानीपत तक 70.5 किमी की दूरी में 113 जगह ऐसी है, जहां जान जाने का सबसे ज्यादा डर रहता है।
एनएचएआई व हाईवे निर्माण कंपनी के अधिकारियों की लापरवाही के कारण बरसात में सफर करना सबसे परेशानी भरा है, क्योंकि नेशनल हाईवे के बीच में 10 फुट तक गहरे गड्ढे हैं तो किनारों पर तालाब तक बने हुए हैं। वहीं जिन जगहों पर फ्लाईओवर बनाए जाने हैं, वहां ट्रैफिक वन-वे होने के कारण आए दिन जाम लगने से 70.5 किमी के सफर में 6 घंटे तक लग रहे हैं।
नेशनल हाईवे 44 पर वाहनों का भार लगातार बढ़ता जा रहा है, क्योंकि यहां से जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, गुजरात समेत अन्य राज्यों के रोजाना लगभग 1.5 लाख वाहन गुजरते हैं। इन वाहनों से टोल टैक्स वसूलने के लिए दिल्ली से पानीपत के बीच नेशनल हाईवे पर मुरथल में टोल प्लाजा भी लगाया हुआ है और हर महीने 20 करोड़ रुपये से ज्यादा का टोल वसूला जाता है।
वाहन चालकों से भारी भरकम टोल वसूलने के बावजूद नेशनल हाईवे पर कोई सुविधा नहीं मिल रही है, बल्कि वाहन चालकों को परेशानी उठानी पड़ रही है और उनको जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है। क्योंकि सड़क के बीच व किनारों पर गहरे गड्ढे खुदे हुए हैं और वाहन आगे भी निकालने की कोशिश करते हैं तो वाहन गड्ढे में गिरने से दुर्घटना हो जाती है।
बरसात में हालात कुछ ज्यादा खराब हो गए हैं और सड़क की खुदाई करके छोड़ने से किनारों से मिट्टी भी कटकर गड्ढों में जाने लगी है। जिससे वाहन चलाने में ज्यादा खतरा हो रहा है।
इस तरह एनएचएआई व हाईवे निर्माण कंपनी के अधिकारियों की लापरवाही के कारण वाहन चालकों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है। जिसपर अधिकारी ध्यान देने को तैयार नहीं हैं और हाईवे के हालात सुधरने की जगह खराब होते जा रहे हैं।