सोनीपत। मुरथल स्थित दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में बुधवार को काफी विद्यार्थियों ने रोष जताते हुए कुलपति कार्यालय के बाहर धरना दिया। उनका आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से नई शिक्षा नीति को 2024-25 सत्र के विद्यार्थियों पर पिछली तिथि से लागू कर दिया गया है। अचानक लिए गए इस फैसले से हजारों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है।
विद्यार्थियों का कहना है कि नई शिक्षा नीति में यह प्रावधान जोड़ा गया है कि अगर किसी छात्र के पहले वर्ष में 5 विषयों में री-अपीयर है तो उसका पूरा एक साल ड्रॉप कर दिया जाएगा। इस नियम को लागू करते समय न तो दाखिले के वक्त विद्यार्थियों को जानकारी दी गई न ही परीक्षा के दौरान इस संबंध में बताया गया।
वर्तमान में जब विद्यार्थी द्वितीय वर्ष की कक्षा में दाखिला लेकर पढ़ाई कर रहे हैं तो विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से अचानक उन पर नया नियम लागू किया जा रहा है। विद्यार्थियों ने इसे अनुचित, गैर पारदर्शी व उनके हितों के खिलाफ बताया।
विद्यार्थियों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन ने बिना किसी सूचना या परामर्श के यह कदम उठाया है। इससे सैकड़ों विद्यार्थियों की पढ़ाई व कॅरिअर पर संकट आ गया है। विद्यार्थियों ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रबंधन को यह समझना चाहिए कि पिछली तिथि से कोई भी नीति लागू करना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। इससे विद्यार्थियों को मानसिक व शैक्षणिक दोनों रूप से नुकसान झेलना पड़ रहा है।
विद्यार्थियों की मांगें
नई शिक्षा नीति को 2024-25 सत्र पर पिछली तिथि से लागू करने का निर्णय तुरंत वापस लिया जाए।
जो विद्यार्थी पहले ही दूसरे वर्ष की कक्षाओं में दाखिला ले चुके हैं उन्हें बिना किसी रुकावट अपनी पढ़ाई जारी रखने दी जाए।
भविष्य में किसी भी नई नीति को लागू करने से पहले विद्यार्थियों को पूरी जानकारी दी जाए और उनका पक्ष सुना जाए।
नई शिक्षा नीति को लागू किए जाने के बाद विद्यार्थियों को कुछ परेशानियां आई हैं। इन परेशानियों का तकनीकी रूप से समाधान करने के लिए कमेटी बनाई गई है। जल्द ही उनकी समस्या को दूर करवाया जाएगा। -श्रीप्रकाश सिंह, कुलपति, मुरथल विश्वविद्यालय।