पहले ही कोरोना की मार झेल रहे देश में मशहूर मुरथल के ढाबों पर भी अब किसान आंदोलन का असर दिखने लगा है। किसान आंदोलन के कारण नेशनल हाईवे 44 बंद होने से होटल और ढाबा मालिकों को करोड़ों का नुकसान हो रहा है। कुंडली से लेकर मुरथल तक के होटल व ढाबों में पहले करीब दो लाख लोग रोजाना खाना खाते थे, वहीं अब करीब 5-10 हजार लोग ही उन पर पहुंच रहे हैं। इनमें भी स्थानीय लोग ज्यादा होते हैं।
होटल और ढाबे वालों के लिए ऐसी स्थिति हो गई है कि उनका खर्च तक नहीं निकल रहा है और कर्मचारियों का वेतन तक भी जेब से देना पड़ेगा। होटल व ढाबा मालिकों ने जल्द से जल्द इसका कोई समाधान करने की मांग उठाई है।
कृषि कानून रद्द कराने के लिए नेशनल हाईवे 44 के सिंघु बॉर्डर पर किसानों ने 20 दिन से धरना दिया हुआ है। इसससे नेशनल हाईवे पूरी तरह से जाम है। दिल्ली से न कोई आ सकता है तो न वहां कोई जा सकता है। नेशनल हाईवे 44 से होकर ही दिल्ली से हरियाणा के कई जिलों के अलावा पंजाब, हिमाचल, जम्मू कश्मीर लोग जाते हैं। लेकिन किसान आंदोलन के कारण नेशनल हाईवे जाम होने से आवाजाही बंद हो गई है।
इस हाईवे से पहले जहां रोजाना करीब एक लाख वाहन गुजरते थे, वहीं अब यह आंकड़ा केवल 20 प्रतिशत रह गया है। इसका असर देशभर में मशहूर मुरथल के ढाबों पर भी दिखना शुरू हो गया है। कुंडली से लेकर मुरथल तक करीब 80 होटल और ढाबे हैं। इन पर दिल्ली व यूपी के काफी लोग पहुंचते थे। नेशनल हाईवे 44 से सफर करने वाले अधिकतर लोग इन ढाबों पर खाना खाकर जाते थे।
दिल्ली से आते थे काफी लोग, हाईवे से गुजरने वाले जाते थे रुककर
नेशनल हाईवे 44 से जितने भी लंबे रूट के वाहन होते हैं, वह अधिकतर कुंडली और मुरथल के ढाबों पर रुककर जाते हैं। इसके अलावा दिल्ली व यूपी के लोग तो अपने परिवारों के साथ विशेष तौर पर खाना खाने के लिए मुरथल के ढाबों पर आते है।
पहले कोरोना के कारण ढाबे बंद रखने पड़े थे। अब धीरे-धीरे हालात सुधरने लगे थे, तो अब किसान आंदोलन के कारण नेशनल हाईवे 44 जाम है। इससे वाहनों की आवाजाही बंद है और ढाबों पर लोग नहीं आ रहे है। नेशनल हाईवे बंद होने की वजह से करीब 90 प्रतिशत नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसका जल्द ही कोई समाधान निकाला जाना चाहिए। - देवेंद्र कादियान, चेयरमैन मन्नत हवेली
नेशनल हाईवे 44 बंद होने के कारण लोग ढाबे पर नहीं आ रहे है। जहां पहले काफी लोग आते थे, वहीं अब आवाजाही बंद होने से बड़ा असर पड़ा है। जल्द ही सरकार को समस्या का समाधान करना चाहिए और इस मामले को निपटाना चाहिए। जिससे किसी को कोई परेशानी नहीं हो और ढाबे भी दोबारा से पहले की तरह चल सकें। - अमरीक, सुखदेव ढाबा