मुकेश सैनी को 10 तो प्रतिद्वंद्वी पूनम देवी को मिले सात वोट
फोटो 17: सोनीपत के खरखौदा नपा कार्यालय में उप अध्यक्ष चुनाव जीतने के बाद मुकेश सैनी विधायक पवन खरखौदा व नपा अध्यक्ष हीरा लाल इंदौरा को मिठाई खिलाते हुए। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
खरखौदा। नगर पालिका कार्यालय में वीरवार को उप अध्यक्ष का चुनाव किया किया गया। एसडीएम डॉ. निर्मल नागर के नेतृत्व में कराए गए चुनाव में वार्ड 16 से पार्षद मुकेश सैनी 10 वोट पाकर जीतने में कामयाब रहे। दूसरे प्रत्याशी वार्ड-12 से पार्षद पूनम देवी को सात वोट मिले।
वोटिंग से पहले नपा कार्यालय में पहुंचे विधायक पवन खरखौदा ने पार्षदों और प्रत्याशियों को सर्वसम्मति बनाने की बात कही, लेकिन बात नहीं बनने पर चुनाव का फैसला लिया गया।
मार्च में नगरपालिका के अध्यक्ष के साथ 16 वार्ड का चुनाव हुआ था, लेकिन उपाध्यक्ष का चुनाव नहीं हो पाया था। वीरवार को हुए नपा उप अध्यक्ष के चुनाव के लिए एसडीएम डाॅ. निर्मल नागर की देखरेख में 10:45 से 11:15 बजे तक आवेदन किए गए। शुरुआत में न कोई पार्षद नपा कार्यालय पहुंचा और न प्रत्याशी, लेकिन कुछ ही देर में दो प्रत्याशियों ने नामांकन किया।
इसके बाद विधायक पवन खरखौदा नपा कार्यालय पहुंचे और खरखौदा के विकास को प्राथमिकता में रखते हुए सर्वसम्मति से उपाध्यक्ष चुनने पर जोर दिया, मगर उनकी कोशिश काम नहीं आई। इसके बाद ईवीएम से मतदान करवाया गया। वोटिंग में सभी 16 पार्षद के साथ नपा अध्यक्ष हीरा लाल इंदौरा ने भी मतदान किया। प्रत्याशी मुकेश को 10 मत मिले, जबकि पूनम देवी को सात वोट मिले।
सर्वसम्मति नहीं बनने पर नाराज दिखे विधायक
विधायक पवन खरखौदा इस दौरान सर्वसम्मति न बनने से नाराज भी दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि काम सरकार को करना है, लेकिन भाईचारा दिखाया जाना चाहिए था। उनकी तो अंतिम व आखिरी विनती थी। उन्हें भी इस वोटिंग से यह पता चल गया कि कौन किसके साथ है। विधायक ने इस दौरान शायरी के माध्यम से अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की।
खरखौदा के विकास पर ध्यान दें पार्षद
नगर पालिका अध्यक्ष हीरा लाल इंदौरा ने कहा कि चुनाव का खेल कुछ समय के लिए था। यहां सब भाई हैं और खरखौदा के विकास की हम पर जिम्मेदारी है। ऐसे में सब कुछ भूलकर अब सभी को मिलकर खरखौदा के विकास पर ध्यान देना है।
मनोनीत पार्षद को लेकर बैठक टली
वीरवार को खरखौदा नपा कार्यालय में मनोनीत पार्षदों को लेकर बैठक होनी थी, मगर उपाध्यक्ष के चुनाव के बाद यह बैठक नहीं हो सकी। नपा उप अध्यक्ष पद के लिए सर्वसम्मति न बनने और बात वोटिंग तक चले जाने को इसको जोड़कर देखा जा रहा है।