शुक्रवार दोपहर तक चली झमाझम बारिश ने नगर निगम के दावों की पोल खोलकर रख दी है।
एक तरफ बारिश जिले के धान उत्पादक किसानों के लिए राहत लेकर आई तो शहर में बरसाती पानी की निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने से कई क्षेत्रों में राहगीरों के लिए आफत बन गई।
जिले में सबसे अधिक बारिश सोनीपत क्षेत्र में 41 एमएम दर्ज की गई है जबकि गोहाना से इन्द्र देवता नाराज ही रहे। खरखौदा में 36 एमएम और गन्नौर में 04 एमएम बारिश दर्ज की गई है।
शुक्रवार सुबह आसमान में बादल छाए, तेज हवाएं चलने लगी। जिसके बाद करीब सुबह सात से बारिश का दौर शुरू हुआ।
धान उत्पादक किसानों को बारिश से कुछ राहत मिली क्योंकि गर्मी के कारण एवं बिजली की कटौती के चलते फसलों तक पानी की व्यवस्था करना कठिन कार्य था।
वहीं गर्मी व उमस के कारण बारिश का इंतजार कर रहे जिले वासियों के चेहरे पर शुक्रवार प्रात: रौनक छा गई। सुबह शुरू हुई बूंदाबांदी देखते-देखते झमाझम बारिश में बदल गई।
बारिश शुरू होते ही लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। लोगों ने गलियों व छतों पर जाकर बारिश का लुत्फ उठाया। बारिश के पानी में बच्चे अठखेलियां करते दिखाई दिए।
शहर के विभिन्न इलाकों में भरा पानी
बारिश के पानी की निकासी न होने से शहर के अनेकों मार्गों पर पानी जमा रहा। स्थिति यहां तक खराब थी कि छोटे वाहनों का वहां से गुजारना किसी बड़ी मुसीबत से कम नहीं था।
शहर में शनि मंदिर अंडरब्रिज में पानी जमा होने के कारण काफी समय तक वाहनों का आवागमन थम सा गया।
वहीं कामी रोड पर शुगर मिल्स के पास से गुजरने वाले वाहन चालक इधर-उधर भटकते दिखाई दिए जबकि गीता भवन चौंक, सब्जी मंडी, ओल्ड डीसी रोड सहित अनेकों मार्गों पर काफी मात्रा में पानी जमा रहा।
जिसके कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
घरों में आई दरार
भारी बारिश के चलते गांव नाथूपुर में जोहड़ भर गए। जि सके चलते कई घराें में दरारें आ गई। ग्रामीण नरेश कुमार के कहना है कि हलकी से बारिश से भी खाली प्लाटों में पानी भर जाता है। गांव में बीमारियां फैलने का भी खतरा बना रहता है। पानी से जमा होने से घरों में दरारें तक आ गई है।