फोटो 35. सोनीपत के सेक्टर-14 में घूमते बंदर। संवाद
सोनीपत। बंदरों के आतंक से शहरवासी परेशान है। 15 माह से बंदरों को पकड़ने के लिए कोई पहल नहीं हो रही है। निगम के अधिकारियों की अनदेखी का खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है। पिंजरे में बंद बंदरों की मौत के बाद जून, 2023 में एजेंसी का टेंडर रद्द कर दिया था। निगम क्षेत्र में 800 से ज्यादा बंदर घरों की छतों पर घूम रहे हैं। बंदरों के काटे जाने की वजह से लोग घायल हो रहे हैं। अस्पताल में हर माह करीब 700 मरीज रेबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं।
नगर निगम क्षेत्र में रह रहे लोग बंदरों के उत्पात से परेशान हैं। सेक्टर 14-15, माॅडल टाउन, महलाना रोड, वार्ड नं. 1 व 2 समेत कई इलाकों में ज्यादा परेशानी है। लोगों ने बंदरों से बचाव के लिए अपने घरों में जाल तक लगवा रखे हैं। बंदर प्रतिदिन चार से पांच व्यक्तियों को काट रहे हैं। बंदरों के डर से लोग अपने घरों की छत पर जाने से भी कतरा रहे हैं। शहरवासी निगम अधिकारियों से बंदरों को जल्द पकड़वाने की मांग कर रहे हैं। लेकिन निगम अधिकारियों को नवंबर 2023 से बंदर पकड़वाने के लिए एजेंसी नहीं मिल रही है। नगर निगम की ओर से चार बार टेंडर लगाया जा चुका है। पांचवीं बार लगाया गया टेंडर आचार संहिता लगने के कारण नहीं खुल पाया।
बंदरों की मौत होने पर रद्द किया था टेंडर
नगर निगम ने बंदर पकड़ने के लिए पहले टेंडर आवंटित किया था। नगर निगम की तरफ से वेलकम को ऑपरेटिव सोसाइटी को प्रति बंदर पकड़ने के लिए 1800 रुपये दिए जा रहे थे। जून 2023 में सोसाइटी के कारिंदों ने बंदरों को पकड़कर गढ़ी ब्राह्मणान स्थित एक कमरे के अंदर रखे पिंजरों में बंद कर दिया था। तब बंदरों की भूख-प्यास से मौत हो गई थी। इसके बाद अधिकारियों ने एजेंसी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। बंदरों से क्रूरता मामले में कार्रवाई करते हुए नगर निगम ने सोसाइटी का टेंडर रद्द कर दिया था।
बंदरों को पकड़ने के लिए टेंडर पांचवीं बार लगाया था। आचार संहिता लागू होने के बाद टेंडर नहीं खोला गया। आचार संहिता हट गई है। जल्द टेंडर आवंटित करके बंदरों को पकड़वाया जाएगा।
- सुंदर मलिक, सफाई निरीक्षक, नगर निगम, सोनीपत