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ठेकेदारों ने किसानों की जमीन में करोड़ों का अवैध खनन किया, अफसरों के मामला दबाने पर चंडीगढ़ हुई शिकायत, जांच करने दौड़े अधिकारी

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असदपमुर-नांदनौर में अवैध रेत खनन की शिकायत पर जांच करने पहुंचे खनन विभाग के अधिकारी - फोटो : Sonipat
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सोनीपत। रेत खनन ठेकेदारों ने नया खेल शुरू कर दिया। पट्टा लेने के बाद किसानों की जमीन में अवैध रूप से खनन करने लगे हैं। असदपुर में ठेकेदारों के इस कारनामे से किसानों में गुस्सा है। पता चलने पर किसानों ने खनन विभाग, पुलिस व डीसी के पास शिकायत की, लेकिन उस शिकायत को दबा दिया गया। किसानों ने चंडीगढ़ में डायरेक्टर व सीएम विंडो पर शिकायत की तो वहां से जांच के आदेश आने पर अधिकारियों ने दौड़ लगाई। खनन विभाग के अधिकारियों ने यमुना में जाकर जांच की तो वहां ठेकेदारों द्वारा अवैध खनन करने से किसानों की जमीन में गहरे गड्ढे हुए मिले। इस मामले में अधिकारियों की जांच रिपोर्ट के आधार पर ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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असदपुर में यमुना के अंदर रेत खनन के लिए पट्टा छोड़ा हुआ है। वहां ठेकेदारों ने दो महीने पहले बड़ा खेल कर दिया और खनन विभाग की ओर से जितनी जगह रेत उठाने के लिए हुई थी। उसके अलावा नांदनौर के किसानों सीताराम व राकेश की जमीन में अवैध रूप से रेत खनन कर लिया। ठेकेदारों ने कई जेसीबी लगवाकर दो-तीन दिनों के अंदर ही करोड़ों रुपये का खनन कर लिया और किसानों की जमीन में गहरे गड्ढे कर दिए। इस बारे में पता चलने पर किसान वहां पहुंचे तो उस जमीन को फसल बोने की स्थिति तक में नहीं छोड़ा गया। जिससे दोनों किसानों ने खनन विभाग, पुलिस व डीसी के पास शिकायत दी, लेकिन उसके बावजूद असदपुर के खनन ठेकेदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई और उस शिकायत को दबा दिया गया। अफसरों के इस रवैया के बाद भी किसानों ने हिम्मत नहीं हारी और किसानों ने खनन विभाग के डायरेक्टर व सीएम विंडो पर शिकायत कर दी।
ठेकेदारों पर केस दर्ज कराने की तैयारी
इस मामले में जांच के आदेश आने पर खनन विभाग के अधिकारियों को दौड़ लगानी पड़ी। जिला खनन अधिकारी अशोक कुमार, खनन निरीक्षक गुलशन अपने साथ पुलिस को लेकर जांच के लिए असदपुर में पहुंचे। जहां यमुना में किसान की जमीन में अवैध खनन के कारण गहरे गड्ढे हुए मिले। वहां जमीन की नपाई करने के साथ ही जांच करके टीम वापस लौट गई। इस मामले में खनन विभाग की जांच रिपोर्ट के आधार पर ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और मुकदमा तक दर्ज कराया जा सकता है। उधर, जमीन के खेती लायक भी नहीं छोड़े जाने से किसानों में गुस्सा है।
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