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मेरी फसल-मेरा ब्योरा : फसल पंजीकरण में पीछे रह गया राई ब्लॉक

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सोनीपत। मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर फसल पंजीकरण को किसान आगे नहीं आ रहे हैं। जनवरी माह के तीन सप्ताह बीतने के बाद भी अब तक जिले में 1.25 लाख एकड़ भूमि का ही पंजीकरण हो पाया है। फसल पंजीकरण में राई ब्लाक सबसे पीछे चल रहा है। जहां किसानों ने करीब 16 फीसदी भूमि का ही पंजीकरण करवाया है। ऐसे में कृषि विभाग ने राई सहित विभिन्न ब्लॉक में किसानों को मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर फसल पंजीकरण करवाने के लिए जागरूक करने का फैसला किया है।
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फसल खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने व फसलों के उत्पादन और रकबे का सही आकलन करने के लिए सरकार ने मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल योजना लागू की थी। जिसके तहत किसानों को अपनी फसलों का पंजीकरण करवाना अनिवार्य होता है। बिना फसल पंजीकरण के किसान कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते और न ही उसकी फसल सरकारी रेट पर खरीदी जाती है। खरीफ सीजन में अपेक्षाकृत कम किसान फसल पंजीकरण करवाते हैं।
अधिकतर धान की किस्म खुली मंडी में बोली के माध्यम से बिक जाती है। परंतु रबी सीजन में गेहूं की खरीद सरकार करती है। ऐसे में किसानों के लिए फसल पंजीकरण करवाना अनिवार्य हो जाता है। इसके लिए पोर्टल पर अब तक आधार कार्ड व जमीन की फर्द के आधार पर भी फसलों का पंजीकरण हो जाता था, लेकिन अब परिवार पहचान पत्र को अनिवार्य कर दिया गया है। जिसके चलते ऐसे किसानों की परेशानी बढ़ गई है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश के ऐसे लोगों की फसलों का पंजीकरण नहीं हो पा रहा है, जिनकी जमीन सोनीपत में है। यही नहीं परिवार पहचान पत्र में त्रुटियों के कारण भी कई किसानों की फसलों का पंजीकरण नहीं हो पा रहा है। पटवारियों की हड़ताल का भी इस पर असर हो रहा है।
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पंजीकरण में गोहाना के किसान सबसे आगे

गोहाना ब्लाक के किसानों ने अब तक करीब 37 हजार एकड़ भूमि में अपनी फसलों का पंजीकरण करवा लिया है। जबकि सोनीपत ब्लाक में 30 हजार, खरखौदा ब्लाक में करीब 15 हजार एकड़, खानपुर ब्लॉक में 13 हजार एकड़, गन्नौर ब्लॉक में 23 हजार एकड़ व राई ब्लॉक में 7 हजार एकड़ भूमि का पंजीकरण कराया है।

वर्जन

मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर किसानों को फसल पंजीकरण के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जिन ब्लॉक में कम पंजीकरण हुआ है, वहां विशेष तौर पर अभियान चलाया जाएगा। - डॉ. पवन शर्मा, कृषि उपनिदेशक, सोनीपत
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