कोरोना की जांच के लिए 9000 से ज्यादा लोगों के सैंपल ले चुके मेडिकल ऑफिसर डॉ. सचिन खुद संक्रमित हो गए। इसके साथ ही उन्होंने खुद को होम आइसोलेट कर लिया और परिवार के सभी सदस्यों की जांच कराई तो वह भी कोरोना संक्रमित मिले। लेकिन उन्होंने परिवार के सदस्यों में कोरोना का डर पैदा नहीं होने दिया। यही कारण है कि हौसले के साथ डॉ. सचिन व उनके पूरे परिवार ने कोरोना से जंग जीती और परिवार में 75 साल की दादी होने के बाद भी किसी को अस्पताल नहीं पहुंचने दिया। मेडिकल ऑफिसर डॉ. सचिन कोरोना से जंग जीतकर अब दोबारा कोरोना मरीजों के इलाज में जुट गए हैं।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रोहट के मेडिकल ऑफिसर डॉ. सचिन सीएचसी फिरोजपुर बांगर में अपनी सेवाएं देते हुए कोरोना जांच के लिए 9000 से ज्यादा लोगों के सैंपल ले चुके हैं। जबकि वहां पर बनाए गए आइसोलेशन वार्ड में भी रहते हुए उन्होंने संक्रमितों का इलाज करने का काम किया। डॉ. सचिन पीएचसी में लगातार कोरोना जांच के लिए सैंपल लेने व वैक्सीन लगाने के दौरान कोरोना संक्रमण की चपेट में आए। डॉ. सचिन ने 14 अप्रैल को कोरोना जांच कराई और रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद खुद को होम आइसोलेट कर लिया। इसके साथ ही उनके पिता धर्मबीर, माता मीना कुमारी, 75 साल की दादी रत्नी देवी, चाची ललिता व भाई पुलकित भी कोरोना संक्रमित हो गए।
बहादुरगढ़ के रहने वाले डॉ. सचिन ने बताया कि घर पर रहते हुए परिवार के सभी सदस्यों संग सादा भोजन किया। कोरोना संक्रमण के दौरान ऑक्सीजन की कमी नहीं रहे, ऐसे में परिवार के सदस्यों को रोजाना छह से 10 बार भांप दी और कोरोना को मात देने के लिए व्यायाम किया। ऐेसे में परिवार के किसी भी सदस्य को अस्पताल जाने की आवश्यकता नहीं पड़ी। अब सोमवार को फिर डॉ. सचिन ने अपनी ड्यूटी ज्वाइन की है। उनका कहना है कि संक्रमण से उबरकर वे दोबारा से अपनी जिम्मेदारी को संभाल रहे हैं। सभी लोगों के साथ मिलकर कोरोना संक्रमण को हराने का काम किया जाएगा, ताकि कोरोना के संकट को जल्द ही दूर किया जा सके।