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हमारे घर में शादी है, कब और कैसे मिलेंगे ढाई लाख

Fri, 18 Nov 2016 01:09 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, सोनीपत
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लाइन में खड़े। - फोटो : sonipat
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केंद्र सरकार का नोटबंदी का फैसला आम आदमी के लिए गले की फांस बनता जा रहा है। जिन परिवारों में इस सीजन में शादियां होने वाली हैं, वह सबसे अधिक चिंतित हैं। लघु सचिवालय स्थित हेल्पलाइन पर वीरवार को 300 से अधिक काल आईं, जिनमें अधिकतर ने शादी के लिए मिलने वाले ढाई लाख रुपये के संबंध में जानकारी ली। हालांकि, बैंकों के पास इस संबंध में कोई नोटिफिकेशन नहीं आया है। इसके अलावा बैंक अधिकारियों ने कैश उपलब्ध नहीं होने का हवाला देते हुए अब अपने हाथ खड़े कर लिए हैं। पीएनबी प्रबंधन की मानें तो नोटबंदी के आठ दिनों में उनके पास केवल 12 करोड़ रुपये के छोटे नोट पहुंचे हैं, जबकि उनके जिले भर की शाखाओं का काम चलाने के लिए रोजाना 40 करोड़ रुपये की आवश्यकता है। वीरवार को पीएनबी की जिले भर की शाखाओं में मात्र 40 लाख रुपये थे, जिस कारण कैश खत्म होने से उपभोक्ताओं को काफी परेशानी हुई।
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बैंकों के पास नहीं पहुंचा नोटिफिकेशन
बता दें कि जिले में इस सीजन में तीन हजार से अधिक शादियां होनी हैं। शादी के लिए ढाई लाख रुपये दिए जाने के केंद्र सरकार के एलान से उपभोक्ताओं को हल्की राहत की उम्मीद नजर आई है। लेकिन बैंकों के पास इस संबंध में फिलहाल कोई नोटिफिकेशन नहीं पहुंचा है, जिस कारण उन्हें अभी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। लीड बैंक मैनेजर नरेंद्र शर्मा ने बताया कि फिलहाल बैंकों के पास उपभोक्ताओं को देने के लिए पर्याप्त कैश नहीं है। ऐसे में आने वाले दिनों में परेशानी बढ़ सकती है।

रजिस्टर में रखा जाएगा कॉल का रिकार्ड
बैंक उपभोक्ताओं की समस्याओं के लिए लघु सचिवालय में शुरू की गई हेल्पलाइन पर काफी संख्या में कॉल आ रही हैं। वीरवार को लगभग 300 लोगों ने हेल्पलाइन पर अपनी समस्याएं बताईं। इनमें अधिकतर शादी के लिए मिलने वाले ढाई लाख रुपये के संबंध में रहीं। हेल्पलाइन पर बढ़ती शिकायतों को देखते हुए जिला उपायुक्त ने सभी कॉल का रिकॉर्ड एक रजिस्टर में दर्ज करने के आदेश दिए हैं। रजिस्टर में कॉल करने वाले का पता और समस्या आदि का लेखाजोखा रखा जाएगा।
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दूसरे दिन भी नहीं पहुंची स्याही 
नोट बदलवाने वाले उपभोक्ता की अंगुली पर स्याही लगाए जाने का केंद्र सरकार आदेश जिले में दूसरे दिन भी लागू नहीं हो सका। अधिकतर बैंकों में अभी तक स्याही नहीं पहुंची है जिस कारण कामकाज अन्य दिनों की तरह ही जारी रहा। स्याही कब तक उपलब्ध होगी, इस बारे में भी अधिकारी कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं।

को-ऑपरेटिव बैंकों ने भी बंद किए 500 और 1000 रुपये के नोट
को-ऑपरेटिव बैंकों ने भी 500 और 1000 रुपये के नोट लेने बंद कर दिए हैं। आशंका है कि काफी संख्या में लोग अपने काले धन को ठिकाने लगाने के लिए किसानों का सहारा ले रहे थे। इसकी भनक बैंकों को लगी तो बैंकों ने नोट लेने बंद कर दिए हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक किसान ने बताया कि एक काले धन वाले व्यक्ति ने उससे संपर्क साधा था कि वह उसका लोन चुका देगा। लेकिन, जब स्थिति सामान्य हो जाएगा तो उसे फिर से लोन लेकर उसे पैसे वापस करने होंगे। इसमें किसान का यह फायदा होगा कि उसकी डिफाल्टरी टूटने के साथ-साथ ब्याज का पैसा भी नहीं देना पड़ेगा। वहीं, काले धन वाले व्यक्तियों को 10 से 20 फीसदी के नुकसान पर ही नए नोट मिल जाएंगे।

अब शराब ठेकेदारों का सहारा
नोट एक्सचेंज करने वालों ने अब शराब ठेकेदारों की टोह लेनी शुरू कर दी है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि हर ठेकेदार के ठेके की मासिक किस्त 15 लाख से 50 लाख रुपये के बीच है। वहीं ये पैसे बड़े नोटों में जमा करवाए जा रहे हैं, लेकिन ठेकों पर सेल केवल छोटे नोटों में ही हो रही है। इस कारण शराब ठेकेेदार काले धन वालों के लिए नोट एक्सचेंज करने में मददगार साबित हो रहे हैं। शहर में चर्चा है कि कुछ ठेकेदार 40 फीसदी कमीशन पर ऐसा कर रहे हैं।

दिव्यांगों व वृद्धों के लिए अलग लाइन नहीं 
जिले के किसी भी बैंक में दिव्यांगों व सीनियर सिटीजन के लिए अलग से लाइन की सुविधा नहीं है। केंद्र सरकार व आरबीआई के स्पष्ट आदेश के बावजूद बैंक आदेशों की पालना नहीं कर रहे हैं। सीनियर सिटीजन आम लाइनों में घंटों खड़े रहकर पैसे निकलवा रहे हैं।

कैशलैस एटीएम बन रहे दर्द का कारण
बुधवार तक शहर के निजी बैंकों के एटीएम पर कैश मिल रहा था। वीरवार को एचडीएफसी, एक्सिस और आईसीआईसीआई जैसे निजी बैंकों के एटीएम में भी कैश खत्म हो गया। वहीं, दोपहर बाद जब सुभाष चौक स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा के एटीएम पर कैश आया तो लोगों की लंबी लाइन लग गई। देरी से पहुंचे लोगों को कैश नहीं मिल सका, क्योंकि कैश खत्म हो गया।

बैंक वालों का दर्द, सपने में भी दिखती हैं लाइनें
जब से नोटबंदी हुई है, तब से रात को सपने में भी लाइनें ही नजर आती हैं। रात को उस समय घर पर पहुंचते हैं, जब बच्चे सो चुके होते हैं। सुबह जब आंख खुलती है तो बच्चे स्कूल जा चुके होते हैं, लेकिन उसके बाद बैंक पहुंचने की जल्दी में परिवार का कोई ध्यान नहीं है। दिन के समय हालात ये होते हैं चाय मंगवा लेते हैं, लेकिन कई बार पी भी नहीं पाते। यह दर्द है एचडीएफसी बैंक में तैनात असिस्टेंट मैनेजर प्रदीप मान का। इस बारे में एलडीएम नरेंद्र शर्मा का कहना है कि कर्मचारी अपने परिवार की शादियों के कार्ड लेकर आते हैं, लेकिन वे छुट्टी नहीं दे पा रहे हैं। हालात के आगे वह मजबूर हैं। वहीं, लोग भी समझने की बजाय उनसे उलझ रहे हैं। कैश खत्म होने के बाद वे जनता की मदद नहीं कर पाते।

भुगतान के नकदी रहित विकल्प अपनाएं : पांडुरंग 
उपायुक्त केएम मकरंद पांडूरंग ने कहा कि सभी व्यापारी, दुकानदार, अस्पताल व अन्य संस्थान नकदी रहित भुगतान करने के विकल्प तलाशें। कार्ड स्वैप मशीन, पेटीएम, चेक और आरटीजीएस जैसी सेवाओं पर जोर दें। नकदी को बार-बार बैंकों से निकालने और कैश को लेकर आ रही कई तरह की दिक्कतों से मुक्ति मिलेगी। गुरुवार को लघु सचिवालय में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि सभी तरह के सिक्के स्वीकार्य हैं और अगर कोई सिक्के लेने में आनाकानी करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने कहा कि बैंक ग्राहकों की सुविधाओं का ध्यान रखें। जहां संभव हो सके वहां टोकन सिस्टम और जहां दूसरे तरीके संभव हों वह करके उपभोक्ताओं को सुविधाएं प्रदान करें। बैंकों में महिलाओं, दिव्यांगों और बुजुर्गों के लिए अलग से लाइन लगाएं। लघु सचिवालय में भी हेल्पलाइन 0130-2220638 पर उपभोक्ता शिकायत दे सकते हैं। इस दौरान नवनियुक्त पुलिस अधीक्षक अश्विनी शैनवी ने कहा कि बैंकों के बाहर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। आम लोगों को किसी तरह की दिक्कत नहीं आने दी जाएगी।

लेबर से भरा कैंटर पकड़ा, चेतावनी देकर छोड़ा
खरखौदा। विभिन्न फैक्ट्रियों व ईंट भट्ठा ठेकेदारों द्वारा कथित रूप से लेबर से अपने पैसे बैंकों में एक्सचेंज कराने की सूचना से प्रशासन दौड़ पड़ा। एसडीएम राजीव अहलावत, तहसीलदार शिव कुमार सैनी, थाना प्रभारी कर्मबीर सिंह ने लेबर से भरा एक कैंटर पकड़ा। एसडीएम राजीव अहलावत ने अपने व्हीकल का दुरुपयोग करने के आरोप में सवारियां भरकर ले जाने व लाने को कानूनन अवैध करार देते हुए कैंटर को इंपाउंड किया। इसके बाद सभी लेबर सवारियों को पुलिस स्टेशन ले जाकर उनकी जांच की गई। इसके बाद लेबर को छोड़ दिया गया। प्रशासन को आशंका है कि इन दिनों लाइनों में लेबर की कतार अधिक होने से आम खाताधारक को परेशानी हो रही है। चर्चा है कि बहुत से फैक्टरी संचालक व ईंट-भट्ठा संचालक अपने कथित कालेधन को व्हाइट करने की जुगत में हैं। ऐसे में खरखौदा प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और विभिन्न बैंकों के सामने लाइन में लगी लेबर से पूछताछ की जा रही है। एसडीएम राजीव अहलावत ने सभी ठेकेदारों व मजदूर वर्ग को चेतावनी दी है कि अगर इस तरह की बात सामने आई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसलिए मजदूर वर्ग किसी दूसरे के पैसे बदलवाने के लिए लाइन में न लगे।

एक कैंटर को तहसील कार्यालय के सामने पकड़ा था, जिसमें भारी संख्या में लेबर थी। उसे बैंक के सामने उतारा जा रहा था। वाहन का अवैध रूप से प्रयोग करने पर वाहन को इंपाउंड किया गया है। लेबर को पूछताछ के बाद चेतावनी देकर छोड़ा गया है। अगर इस तरह की कोई बाद सामने आई तो आरोपियों पर मामला दर्ज किया जाएगा।
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-राजीव अहलावत, एसडीएम खरखौदा।
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