अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने नाबालिग को भगा ले जाने और दुष्कर्म के मामले में आरोपी को दोषी करार दिया है। दोषी को सात साल कैद की सजा सुनाते हुए 25 हजार रुपये का जुर्माना भी किया गया है। वहीं दोषी की मदद करने वाले दंपति को भी अदालत ने नहीं बख्शा। उन्हें 2-2 साल कैद की सजा सुनाते हुए 5-5 हजार रुपये का जुर्माना भी किया है। जुर्माना न भरने पर दोषियों को अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ सकती है। यह फैसला एडीजे आशु संजीव टिंजन की अदालत ने किया है।
सात अक्टूबर, 2013 को गोहाना निवासी एक व्यक्ति ने थाना शहर में दी शिकायत में बताया था कि 16 वर्षीय बेटी को देवीपुरा निवासी सुमित उर्फ कालिया बहला-फुसलाकर भगा ले गया है। इसमें देवीपुरा निवासी गीता, उसके पति सुरेश और दो अन्य लड़कियों ने सुमित की मदद की है। शिकायत पर सभी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने 9 अक्टूबर को आरोपी गीता और उसके पति सुरेश को गिरफ्तार कर लिया था।
10 अक्टूबर को आरोपी सुमित को काबू कर मुंड़लाना रेलवे स्टेशन से नाबालिग लड़की को भी बरामद कर लिया था। मेडिकल में दुष्कर्म की पुष्टि हुई थी। इसके बाद सुमित के खिलाफ दुष्कर्म का मामला भी दर्ज किया गया।
इस मामले में शनिवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आशु संजीव टिंजन की अदालत ने सुमित, गीता और उसके पति सुरेश को दोषी करार दिया।
सुमित को जहां 7 साल कैद की सजा सुनाई गई, वहीं गीता और सुरेश को 2-2 साल कैद की सजा सुनाई गई। जुर्माने के तौर पर सुमित पर 25 हजार रुपये और गीता, सुरेश को 5-5 हजार रुपये जमा कराने के निर्देश दिये हैं। अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि जुर्माना न भरने पर सुमित को 1 साल तथा गीता, सुरेश को 1-1 माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ सकती है। दूसरी ओर मदद की आरोपी दो अन्य नाबालिग लड़कियों का मामला जुवेनाइल कोर्ट में विचाराधीन है।