उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुए एक दर्दनाक अग्निकांड ने सोनीपत के महिपुर गांव के एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां हमेशा के लिए उजाड़ दीं। घर का 'भविष्य' बनाने और अपनी बहन की शादी के सपने संजोकर लखनऊ गए 21 वर्षीय युवक भविष्य की इस भीषण आग में झुलसने से दर्दनाक मौत हो गई। वह अपने बूढ़े माता-पिता का इकलौता सहारा था। नौकरी जॉइन करने के महज 10वें दिन ही बेटे की मौत का संदेश घर पहुंचते ही पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया है।
बहन की शादी के सपने संजोए 6 जून को निकला था घर से
महिपुर गांव का रहने वाला भविष्य बेहद होनहार था। वह अपनी बहन के हाथ पीले करने और परिवार को आर्थिक तंगी से उबारने के सपने देख रहा था। इसी सिलसिले में वह बीती 6 जून को सोनीपत से लखनऊ के लिए रवाना हुआ था। लखनऊ के एक एनीमेशन संस्थान में उसे नौकरी मिली थी, जिसे उसने महज 10 दिन पहले ही जॉइन किया था। लेकिन किसे पता था कि जिस नौकरी से परिवार का भविष्य संवरना था, वही मौत का बुलावा बन जाएगी।
आखिरी वीडियो कॉल: "मां, चारों तरफ धुआं है... अब नहीं बचूंगा"
अग्निकांड के वक्त जब संस्थान की इमारत धू-धू कर जल रही थी, तब भविष्य ने अपनी मां को आखिरी वीडियो कॉल किया था। धुएं और आग की लपटों के बीच घिरे भविष्य ने रोते हुए अपनी मां से कहा, "मां, यहाँ चारों तरफ भयानक धुआं फैल चुका है... मुझे सांस लेने में दिक्कत हो रही है, शायद अब मैं जिंदा नहीं बच पाऊंगा।" बेटे के मुंह से यह आखिरी शब्द सुनते ही मां चीख पड़ी, लेकिन चंद मिनटों बाद ही फोन कट गया और परिवार के अरमान हमेशा के लिए राख हो गए।
माता-पिता का इकलौता सहारा, टूटा दुखों का पहाड़
भविष्य अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसकी मौत ने न सिर्फ एक बूढ़े बाप की लाठी छीन ली, बल्कि एक बहन के सिर से भाई का साया भी हमेशा के लिए हटा दिया। नौकरी के महज 10 दिन और जिंदगी का इस तरह खत्म हो जाना पूरे इलाके को झकझोर गया है। महिपुर गांव में हर आंख नम है और पीड़ित परिवार को सांत्वना देने के लिए ग्रामीणों का तांता लगा हुआ है।