सोनीपत। मानव मिलन के संस्थापक व नेपाल केसरी संत डॉ. मणिभद्र मुनि महाराज ने कहा कि प्रेम व पर्व, दो ऐसी धाराएं हैं, जो मानव जीवन को आनंद, उत्साह व संपूर्णता प्रदान करती हैं। प्रेम का अर्थ केवल किसी के प्रति भावना या आकर्षण नहीं है, बल्कि गहरी व व्यापक संवेदना है, जो मनुष्य को अपने आसपास के लोगों, प्रकृति व जीवन के प्रति जोड़ती है। वहीं, पर्व संस्कृति व परंपरा का प्रतीक है, जो विभिन्न अवसरों पर मनाए जाते हैं।
डॉ. मणिभद्र महाराज गुड़ मंडी स्थित श्रीएसएस जैन सभा जैन स्थानक में चातुर्मास पर आयोजित धर्म सभा में प्रवचन कर रहे थे। मुनि महाराज ने कहा कि मनुष्य को चाहिए कि वह प्रेम को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाएं। पर्वों को पूरी श्रद्धा व उत्साह के साथ मनाएं। इनसे न केवल जीवन को सुखमय बना सकते हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव भी ला सकते हैं। सभा में पुनीत मुनि महाराज व महासाध्वी सृजना व अनुज्ञा महाराज ने भी श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन किया।