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लॉकडाउन: 275 किलोमीटर पैदल चलकर नौ दिन में पंजाब से सोनीपत पहुंच गया मजदूर परिवार

Wed, 15 Apr 2020 10:42 AM IST
रोहतक ब्यूरो अमर उजाला, सोनीपत
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परिवार को शेल्टर होम लेकर जाती पुलिस - फोटो : Sonipat
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कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए पुलिस लगातार सख्ती बरत रही हैं, लेकिन उसके बावजूद मजदूर परिवार के 10 सदस्य नौ दिन तक पैदल चलकर पंजाब से 275 किलोमीटर दूर सोनीपत के गीता भवन चौक तक पहुंच गए। आखिर में यहां पुलिस ने उन्हें रोक लिया।
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तब खुलासा हो सका कि परिवार लगातार पैदल चल रहा है और उन्हें आगे झज्जर जाना है। जिस पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें शेल्टर होम में पहुंचाया और उनका मेडिकल चेकअप किया गया। बाद में उन्हें मुरथल शेल्टर होम में रखा गया है।

परिवार के सदस्य चने व कुछ लोगों द्वारा दिए गए भोजन को खाकर यहां तक पहुंच गए थे। पंजाब में कर्फ्यू और कई स्थानों पर नाके होने के बावजूद परिवार के सोनीपत पहुंचने पर पड़ोसी जिलों में लगाए नाकों पर भी सवाल उठ रहा है।
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उत्तर प्रदेश में अलीगढ़ के रहने वाले मजदूर परिवार के सदस्य पंजाब के लुधियाना के गांव में रह रहे थे। वह वहां मजदूरी करते थे और इनके परिवार के कुछ सदस्य झज्जर जिले के गांव में रहते हैं। कर्फ्यू व लॉकडाउन के बाद वह भी इनके पास ही झज्जर जाने के लिए निकल लिए।

श्रमिक परिवार की सदस्य आरती ने बताया कि पंजाब में उनका पूरा परिवार एक वर्ष से रह रहा था। वह फैक्टरी में सिलाई का काम करके गुजारा कर रहे थे। लेकिन लॉकडाउन के दौरान फैक्टरी मालिक ने उन्हें निकाल दिया। इसकी वजह से वे पंजाब से 5 अप्रैल को झज्जर के लिए निकल पड़े। इनके परिवार में दो बच्चों सहित 10 सदस्य हैं। इनमें चार महिला और दो पुरुष हैं।
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गुरुद्वारे या किसी से खाना मांगकर खाते हुए यहां तक पहुंचे

मजदूर परिवार के सदस्यों ने बताया कि वह हाईवे के रास्ते दर्जनों बेरिकेड और नाके पार करके गीता भवन चौक तक आ पहुंचे। इस बीच किसी पुलिस कर्मी ने उन्हें रोकने या शेल्टर होम तक भेजने की जहमत नहीं उठाई। वह भी तब जब यह परिवार हाई रिस्क जोन पंजाब से आया था।

इतना ही नहीं पंजाब में कर्फ्यू होने के बावजूद यह परिवार वहां से निकल आया। अगर सोनीपत में भी पुलिस गंभीरता नहीं दिखाती, तो यह श्रमिक परिवार अपने गंतव्य झज्जर के लिए रवाना हो गया होता। लेकिन ऐसा नहीं होने दिया गया और डीएसपी डॉ. रवींद्र कुमार की अगुवाई में तैनात पुलिस बल ने इस परिवार को यहीं पर रोक दिया।

पहले इनकी जानकारी ली गई और बाद में पीसीआर बुलाकर इन्हें सत्यम स्कूल में बने शेल्टर होम भेजा गया। वहां से उन्हें मुरथल भेज दिया गया। उनका मेडिकल कराने के बाद मुरथल शेल्टर होम में रखा गया है। परिवार के सदस्यों ने बताया कि वह 9 दिन से लगातार चल रहे हैं। इस दौरान उनके पैसे भी खत्म हो गए और वह गुरुद्वारे या किसी से खाना मांगकर खाते हुए यहां तक पहुंचे है।

साथ ही उनके पास कुछ चने थे जहां भोजन नहीं मिलता तो वह चने खाकर अपना पेट भर लेते थे। वह पंजाब से जीटी रोड के रास्ते 275 किलोमीटर का सफर तक करके आए हैं। इस दौरान किसी जिले में प्रशासन से मदद नहीं मिली। सोनीपत आने के बाद पुलिस ने उन्हें रोका है और खाने व रहने की व्यवस्था की गई है।

पता लगते ही की गई हरसंभव मदद : डीएसपी
डीएसपी डॉ.रवींद्र कुमार का कहना है कि गीता भवन पर चेकिंग के दौरान मजदूर परिवार के 10 सदस्य मिले। पूछताछ के दौरान पता चला कि वह मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के रहने वाले है और पंजाब से नौ दिन पहले चले थे, जो झज्जर जा रहे है। झज्जर में उनके परिचित 12 वर्ष से रह रहें है। पुलिस ने उन्हें शेल्टर होम में शिफ्ट कर दिया गया है, जहां उनका मेडिकल चेकअप किया गया है। श्रमिकों की शेल्टर होम में रहने की व्यवस्था की दी गई है। लॉकडाउन खत्म होने के बाद उनको जाने की अनुमति दे दी जाएगी।
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