संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। नगराधीश सिमरन ने कहा कि बच्चों का बचपन सुरक्षित रखना समाज और प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है। किसी भी बच्चे से मजदूरी करवाना कानूनन अपराध है। बाल मजदूरी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि जिले में बाल मजदूरी पर पूरी तरह रोक सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण अभियान चलाया जाए। दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों एवं संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
जिले में बच्चों के अधिकारों की रक्षा, बाल मजदूरी की रोकथाम तथा जरूरतमंद बच्चों को पुनर्वास उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से वीरवार को नगराधीश सिमरन ने जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति की बैठक ली। इसमें बच्चों के कल्याण से संबंधित योजनाओं की समीक्षा की गई।
नगराधीश ने कहा कि बच्चों के साथ होने वाले किसी भी प्रकार के शोषण, उत्पीड़न के मामले में तत्काल कार्रवाई की जाए। बच्चों के विरुद्ध अपराध के मामलों में पॉक्सो एक्ट के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
नगराधीश ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जरूरतमंद एवं असहाय बच्चों को सरकार की ओर से संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समय पर उपलब्ध कराया जाए। आर्थिक रूप से कमजोर, अनाथ एवं बेसहारा बच्चों के लिए सहायता योजनाएं चलाई जा रही हैं।
बेसहारा बच्चों को प्रतिमाह 4 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। इससे उनके पालन-पोषण, शिक्षा एवं अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिलती है। नगराधीश ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे पात्र बच्चों की पहचान कर उन्हें योजनाओं से जुड़ावाएं।
नगराधीश ने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा अत्यंत आवश्यक हैं। इसलिए जरूरतमंद बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं एवं आवश्यक चिकित्सा सहायता समय पर उपलब्ध करवाई जाए।
बैठक के दौरान जिले में संचालित बाल देखभाल संस्थानों, बाल गृहों तथा अन्य संरक्षण केंद्रों की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। नगराधीश ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि संस्थानों में रह रहे बच्चों को भोजन, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं मनोरंजन सहित सभी मूलभूत सुविधाएं निर्धारित मानकों के अनुसार उपलब्ध करवाई जाएं। बच्चों की सुरक्षा और सुविधाओं में किसी प्रकार की कमी नहीं रहनी चाहिए।