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85 लाख से सुधारी जाएगी केएमपी की बदतर हालत

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केएमपी पर गड्ढों के बीच से गुजरते वाहन - फोटो : Sonipat
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सोनीपत। केएमपी (कुंडली-मानेसर-पलवल) एक्सप्रेस वे की हालत ज्यादा बदतर होती जा रही है और वहां जगह-जगह सड़क टूटने से रोजाना हादसे हो रहे हैं। जिससे वाहन चालकों के लिए केएमपी अब आफत बनता जा रहा है। यह बड़ा सवाल है क्योंकि 1500 करोड़ रुपये से तैयार केएमपी आखिर कैसे टूटकर बिखरने लगा? हाईटेक हाईवे की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। पीएम नरेंद्र मोदी से छह महीने पहले उद्घाटन कराकर इसे शुरू किया गया था। अमर उजाला में सड़क की दुर्दशा का मामला उठने के बाद एचएसआईआईडीसी के अफसर जागे हैं और केएमपी की हालत सुधारने की तैयारी हो रही है। आनन फानन में इसके सुधार के लिए 85 लाख रुपये स्वीकृत कराए गए हैं और इसका टेंडर लगाया गया है। इसका टेंडर चार दिन बाद छोड़ा जाएगा, जिससे केएमपी को अगले दो महीने में पहले की तरह किया जाएगा ताकि इस पर वाहन फर्राटा भर सकें।
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केएमपी का पत्थर 2003 में हरियाणा के तत्कालीन सीएम ओपी चौटाला ने लगाया था, लेकिन इसका काम 2006 में शुरू किया गया। उस समय काम पूरा करने का समय चार साल तय किया गया था, लेकिन इसे बीच में रोक दिया गया था। इसका दोबारा से 2015 में पीएम नरेंद्र मोदी ने केजीपी के साथ शिलान्यास किया था और इसका काम शुरू हो सका था। इसको पलवल से मानेसर तक वर्ष 2016 में शुरू कर दिया गया था, लेकिन मानसेर से कुंडली तक 19 नवंबर 2018 को शुरू किया गया। यह एक्सप्रेस वे सोनीपत में कुंडली से शुरू होकर दिल्ली के चक्कर लगाते हुए खरखौदा, बहादुरगढ़, मानेसर, सोहना से होते हुए पलवल में खत्म होता है, जिसपर 1500 करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च किए गए हैं। इसका 19 नवंबर को पीएम नरेंद्र मोदी के उद्घाटन करते ही वाहनों का आवागमन शुरू हो गया था। पीएम के उद्घाटन कराने के बाद कोई इसकी सुध नहीं ले रहा है और इस कारण ही केएमपी पर जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं। इस कारण ही वाहन चालकों की जान को खतरा बना हुआ है, क्योंकि वहां गड्ढे आने पर वाहन चालक अचानक ब्रेक लगाते हैं और उससे वाहन भिड़ जाते हैं। केएमपी पर कई जगह ऐसे हालात हैं कि सड़क पूरी तरह से खत्म हो चुकी है तो मुख्य टोल प्लाजा के पास भी सीमेंट वाली सड़क तक उखड़ गई है। जिससे वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। इस तरह के हालात केएमपी पर चल रहे हैं और उससे वाहन चालक काफी परेशान हैं। अब वाहन चालक टोल प्लाज पर सड़क की शिकायत करके आगे निकल रहे हैं।
अमर उजाला ने उठाया मामला तो टेंडर लगाया
केएमपी को शुरू हुए केवल सात महीने का समय हुआ है, लेकिन सात महीने में केएमपी में जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं। जिससे अफसरों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। केएमपी की इस समय हालात इतनी बदतर हो चुकी है कि उसपर जान का खतरा बना हुआ है। क्योंकि लोग वाहनों को तेज दौड़ाते हैं और गड्ढा आने पर अचानक ब्रेक लगाने पड़ते हैं। इससे वाहन आपस में भिड़ते हैं और वहां कई बार बड़े हादसे हो चुके हैं। इसको देखते हुए ही अमर उजाला ने 24 जून के अंक में केएमपी की पूरी स्थिति को प्रकाशित किया, जिससे एचएसआईआईडीसी के अफसरों की नींद खुली है। इसके लिए सरकार से 85 लाख रुपये की मंजूरी कराई गई, जिससे केएमपी की हालत को सुधारा जा सके। वहीं अब इसका टेंडर लगाया गया है जो चार दिन बाद खोला जाएगा। उसके बाद केएमपी को ठीक करने का काम शुरू होगा, जिसे लगभग दो महीने के अंदर पूरा करने की बात कही जा रही है। हालांकि यह कहा जा रहा है कि काम जल्द से पूरा कराया जाएगा, लेकिन बरसात की स्थिति को देखते हुए दो माह का समय रखा जा रहा है।
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केएमपी पर कई जगह सड़क के टूटने की जानकारी मिली है और उसका निरीक्षण करके रिपोर्ट दस दिन पहले ही तैयार कर दी गई थी। केएमपी को पूरी तरह से ठीक कराने के लिए 85 लाख रुपये की मंजूरी मिली है और उसका टेंडर भी लगा दिया गया है। यह टेंडर चार दिन बाद खोला जाएगा और उसके तुरंत बाद ही काम शुरू करा दिया जाएगा। जिससे केएमपी को पहले की तरह से बेहतर किया जा सके।
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-सुरेंद्र देशवाल, सीनियर मैनेजर एचएसआईआईडीसी
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