नरेला। गांव बवाना में अपने घर के बाहर खेल रहे तीन साल के मासूम बच्चे का अपहरण कर लिया गया। जब मामले की शिकायत पुलिस को दी गई तो पुलिस ने छह घंटे की मशक्कत के बाद मामले को सुलझाते हुए आरोपी पड़ोसी युवक, उसकी बहन व मां को गिरफ्तार कर लिया है। अपहृत बच्चे को उसके घर से चार किलोमीटर दूर से बरामद कर लिया गया है। आरोपी बच्चे को डिब्बे में बंद कर ले गए थे। वह उसके छोड़ने की एवज में 75 लाख रुपये फिरौती वसूलना चाहते थे। लेकिन उससे पहले ही धरे गए।
उत्तरी-बाहरी जिला पुलिस उपायुक्त गौरव शर्मा ने बताया कि ईश्वर कॉलोनी, बवाना के रहने वाले संदीप ने रविवार तीसरे पहर स्थानीय पुलिस को बताया था कि उसका तीन साल का बेटा श्रेयांस घर से बाहर खेलते हुए अचानक गायब हो गया। उसे शक है कि किसी ने उसका अपहरण कर लिया है। बच्चे के अपहरण की सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत हरकत में आ गई। एसीपी बवाना विपिन कुमार के निर्देशन और बवाना थाना प्रभारी धर्मदेव के नेतृत्व में इंस्पेक्टर राकेश कुमार, एसआई गजेंद्र, एएसआई दलीप, हवलदार प्रवीन तथा सिपाहियों सुरेश और सुधीर की टीम का गठन किया गया। पुलिस ने बच्चे की तलाश के लिए प्रयास शुरू कर दिया। कोई जानकारी नहीं मिलने पर आठ टीमों का गठन किया गया। बवाना थाना पुलिस ने आस-पास लगे सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की। पुलिस उपायुक्त ने बताया कि सारी मशक्कत के बीच शाम को करीब साढ़े पांच बजे एक बार फिर से सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई। उसमें बच्चा अकेले या किसी के साथ जाता नहीं दिख रहा था। एक फुटेज में पुलिस को घर के पास एक टाटा-एस गाड़ी दिखाई दी। गाड़ी के बारे में पूछताछ करने पर पता चला कि यह पड़ोसी ध्रुव उर्फ संजू (18) की है जो कि उसी दिन परिवार सहित दरियापुर गांव में शिफ्ट कर रहा था। पुलिस को लगा कि इसी गाड़ी का इस्तेमाल श्रेयांस का अपहरण करने में किया गया होगा। उपायुक्त ने बताया कि शक के आधार पर ध्रुव से पूछताछ की गई तो वह घबरा गया। उसके पास मौजूद मोबाइल फोन की जांच की गई तो उसमें श्रेयांस के फोटो मिले। फोन में तीन रिकॉर्डिड मैसेज भी मिले जिसमें श्रेयांश के पिता को संबोधित करते हुए 75 लाख रुपये फिरौती का मांग की गई थी। पूछताछ में ध्रुव ने कबूल कर लिया कि उसने अपनी बहन उर्वशी तथा मां ब्रजेश की सहायता से श्रेयांश का अपहरण किया है। उसने पुलिस को श्रेयांश के दरियापुर गांव में होने की बात बताई। श्रेयांश का पता चलते ही पुलिस ने बताए गए स्थान पर पहुंचकर उसे सकुशल छुड़ा लिया। उस समय ध्रुव की बहन बच्चे की निगरानी कर रही थी, जबकि मां बवाना में ही रहकर श्रेयांश को ढूंढने की कोशिशों पर नजर रख रही थी। श्रेयांश की बरामदगी के साथ ही पुलिस ने मौके से ही उर्वशी को तथा बवाना से ध्रुव और उसकी मां को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए लोगों के कब्जे से पुलिस ने अपराध में इस्तेमाल तीन मोबाइल फोन और गाड़ी तथा टेप बरामद की है।
महीनों से बन रही थी अपहरण की प्लानिंग
ध्रुव लंबे समय से संदीप के पड़ोस में ही रह रहा था। उसने पुलिस को बताया कि उसकी बहन की शादी तय हो चुकी थी और पैसों का इंतजाम नहीं हो पा रहा था। पैसे का इंतजाम करने के लिए उसने श्रेयांश के अपहरण की साजिश रची और रविवार को अंजाम दे डाला। घर से बाहर दो अन्य बच्चों के साथ खेल रहे श्रेयांश को उसने फ्रूटी पीने को दी और उस पर नजर बनाए रखी। मौका मिलते ही वह उसे अपने घर में ले गया और हाथ-पैर तथा मुंह बांध दिए।
श्रेयांश को सामान की तरह पैक करके ले जाया गया
घर में लाते ही दोनों भाई-बहनों और उनकी मां ने श्रेयांश के हाथ-पैर बांधकर मुंह पर टेप चिपका दिया तथा एक डिब्बे में पैक कर दिया। सामान के साथ उस डिब्बे को भी टाटा-एस में रखकर दरियापुर गांव में किराये के नए मकान में पहुंचा दिया गया। फिर योजना अनुसार ध्रुव वापस आया और उस भीड़ का हिस्सा बन गया जो श्रेयांश को ढूंढने में लगी थी।
पहले संदीप की हैसियत का लगाया पता
पुलिस के अनुसार ध्रुव ने अपहरण की साजिश रची थी। उसने श्रेयांश के पिता की माली हालत जांचने के लिए व्हाट्सएप के फ्री फोन फैसिलिटी एप का इस्तेमाल किया। इस एप में फोन करने वालेे के नंबर का पता नहीं चल पता है। पुरानी कारों का धंधा करने वाले संदीप को उसने खुद को फैक्टरी मालिक बताते हुए अपनी महंगी कार बेचने की पेशकश की। हां हो जाने पर उसने अंदाजा लगाया कि संदीप के पास अच्छे पैसे हैं।
क्राइम पेट्रोल देखकर बनाया प्लान
आरोपी ने बताया कि क्राइम पेट्रोल टीवी सीरियल देखकर बच्चे के अपहरण का प्लान बनाया था। हालांकि वह आखिर में पकड़ा गया। उसकी मां व बहन को भी पुलिस ने पकड़ लिया।