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खाप महापंचायत का अल्टीमेटम, आरक्षण आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे 13 सितंबर तक वापस ले सरकार

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खाप पंचायतों की बैठक को संबोधित करता वक्ता। - फोटो : Sonipat
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गोहाना। गांव छिछड़ाना में गठवाला खाप (एक गुट) द्वारा खाप के चबूतरे पर सर्वजातीय सर्वखाप महापंचायत में आरक्षण आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग की गई। महापंचायत में 2012 और 2016 में हुए आरक्षण आंदोलन के दौरान जाट व विभिन्न बिरादरियों के लोगों पर दर्ज मुकदमों को 13 सितंबर तक वापस लेने के लिए प्रदेश सरकार को अल्टीमेटम दिया गया। साथ ही कहा गया कि अगर सरकार ने मुकदमे वापस नहीं लिए तो फिर महापंचायत बुलाकर आंदोलन की घोषणा कर दी जाएगी। महापंचायत में पहुंचे लोगों ने पंचायत से लेकर संसद तक महिलाओं की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की मांग भी की।
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रविवार को हुई महापंचायत की अध्यक्षता गठवाला खाप के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलदीप सिंह मलिक ने की। महापंचायत में पहुंचे विभिन्न खापों के प्रतिनिधियों के सामने गठवाला खाप ने आरक्षण आंदोलन में दर्ज मुकदमे वापस लेने सहित पांच प्रस्ताव रखे। जिसे सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। खाप के राष्ट्रीय महासचिव अशोक मदीना ने कहा कि आरक्षण आंदोलन में 2012 व 2016 में जाटों पर नहीं बल्कि विभिन्न समुदाय के लोगों पर मुकदमे दर्ज हुए थे। प्रदेश सरकार ने आश्वासन के बावजूद मुकदमे वापस नहीं लिए गए। महापंचायत में सरकार को 13 सितंबर तक मुकदमे वापस लेने का अल्टीमेटम दिया गया। वहीं केंद्र सरकार की तरफ से पिछले दिनों किसानों व खेती को लेकर जो तीन नए अध्यादेश लागू किए हैं, उनका भी विरोध किया गया। किसानों को लाभ देने के लिए डीजल की कीमत कम करने और फसलों का उचित मूल्य देने, केंद्र सरकार की मंडी करण बोर्ड को समाप्त करने की नीति को वापस लेने की मांग की गई। महापंचायत में 105 खापों के प्रधान व उनके प्रतिनिधि पहुंचे। महापंचायत में सर्वजातीय सर्वखाप के राष्ट्रीय प्रवक्ता सूबे सिंह समैण, हिसार से धर्मबीर गोयत, अरुण जैलदार, जान सिंह चौहान, भगत सिंह दलाल, विधायक बलराज कुंडू, बलदेश देशवाल, तुलसी ग्रेवाल, धर्मपाल हुड्डा, रामकुंवार, मूर्ति देवी सहित विभिन्न खापों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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