संवाद न्यूज एजेंसी
सोनीपत। जिले की बेटी ने एक बार फिर भारत का सिर ऊंचा किया है। पहलवान काजल ने बुल्गारिया के समोकोव में आयोजित अंडर-20 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। 72 किग्रा वर्ग के फाइनल में काजल ने चीन की लियू युकी को 8-6 से पराजित किया। वह लगातार दूसरे साल विश्व चैंपियन बनी हैं।
गांव लाठ निवासी टैक्सी चालक रविंद्र ढोचक की बेटी काजल ने बचपन से ही अपने चाचा और गुरु कृष्ण ढोचक को देख पहलवानी का सपना देखा। कठिन आर्थिक हालात के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और मेहनत व लगन से आज यह मुकाम हासिल किया है। काजल की यह जीत संघर्ष, मेहनत और सपनों की कहानी है।
टैक्सी चालक पिता रविंद्र ढोचक और मां बबीता की लाडली काजल ने कठिन हालात में भी अपने जज्बे से साबित कर दिया कि सच्ची लगन से कुछ भी संभव है। पहलवानी की प्रेरणा उन्हें अपने चाचा और गुरु कृष्ण ढोचक से मिली, जिन्होंने बचपन से ही उन्हें दांव-पेच सिखाए। काजल ने अपनी ऐतिहासिक जीत का श्रेय अपने माता-पिता और गुरु को समर्पित किया है।
मौजूदा चैंपियन समेत कई को दी पटखनी : प्रतियोगिता में काजल का सफर बेहतरीन रहा। प्री-क्वार्टर फाइनल में बुल्गारिया की एमिली मिहायलोवा अपोस्टोलोवा को तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर 15-4 से हराया। क्वार्टर फाइनल में किर्गिस्तान की कायिरकुल शरशेबाएवा को 7-0 से मात दी। सेमीफाइनल में उनका मुकाबला मौजूदा चैंपियन अमेरिका की जैस्मिन डोलोरेस रॉबिन्सन से हुआ। जिसमें शुरुआती बढ़त गंवाने के बाद 13-6 से अमेरिका पहलवान को चित कर जीत दर्ज की। फाइनल में दमदार खेल दिखाते हुए चीन की पहलवान को हराकर विश्व विजेता बनी।
घर में जश्न का माहौल
मूलरूप से गांव लाठ हॉल सेक्टर-23 निवासी काजल के घर में इस जीत के बाद जश्न का माहौल है। मां बबीता ने खुशी जताते हुए कहा कि सोनीपत लौटने पर बेटी का जोरदार स्वागत किया जाएगा और उसे उसका पसंदीदा चूरमा खिलाया जाएगा। वहीं चाचा और गुरु कृष्ण ने कहा काजल का अगला लक्ष्य 2028 ओलंपिक होगा। जिस जुनून से वह खेल रही है, हमें पूरा विश्वास है कि वह ओलंपिक में गोल्ड लाकर देश का सपना पूरा करेगी।
सफलता की नई ऊंचाइयां
काजल अब तक 16 बार भारत केसरी, दो-दो बार हरियाणा केसरी और दिल्ली केसरी का खिताब जीत चुकी हैं। उनके अंतरराष्ट्रीय पदक की फेहरिस्त भी लगातार लंबी होती जा रही है। परिवार और गांव वालों का कहना है कि काजल विनेश फोगाट के अधूरे सपने को पूरा करते हुए ओलंपिक में सोना लेकर आएंगी।
सात साल की उम्र में चढ़ा कुश्ती का जुनून
पहलवान कृष्ण बताते हैं कि उनकी भतीजी काजल के सिर सात साल की उम्र से ही मुझे देखकर पहलवानी करने का जुनून चढ़ा था। जब मैंने उसकी लग्न देखी तो इस पर ध्यान देना शुरू किया और देखते ही देखते बेटी ने पदकों की झड़ी लगा दी। वह एक साल में दूसरी बार विश्व विजेता बन गई है। काजल ने अगस्त, 2024 में जॉर्डन में आयोजित अंडर 17 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में 69 किलोग्राम भार वर्ग में सोना जीता था।